ऑप्टिक्स वैज्ञानिक प्रो. डी रॉय चौधरी ने बताया कि ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी की मदद से काफी कुछ हो सकता है। टेक्सटाइल के क्षेत्र में भी इस पर काफी काम हो रहा है। ऐसे टेक्सटाइल तैयार किए जा रहे हैं जिसे पहनने के बाद इंसान भी गायब हो जाएगा। इस पर देश और दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।
शुक्रवार को आईआईटी दिल्ली के प्रो. सेंथलकुमारन ने आईआईटी कानपुर में आयोजित ऑप्टिक्स एंड डेवलपमेंट (प्रकाश विज्ञान) विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन इसकी विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
जानकारी देते प्रो. एन मुकुंदा
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उन्होंने बताया कि मौजूदा समय तकनीक की कमी के चलते कई बीमारियों का सही समय पर पता नहीं चल पाता है। देर से बीमारी का पता चलने पर कई मरीजों की मौत भी हो जाती है। इन समस्याओं को देखते हुए ऑप्टिकल टेक्सिस माइक्रोस्कोप की तकनीक को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। ऑप्टिक्स की मदद से हम लोग बॉयोलॉजिकल एप्लीकेशन पर आधारित हाईटेक सेंसर तैयार कर रहे हैं। जो इंसान के शरीर के पूरे हिस्से का चंद मिनटों में अध्ययन करके यह बता देगा कि उसे क्या बीमारी है और शरीर के किस हिस्से में बीमारी है। इसके पहले पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमें देशभर से जुटे रिसर्च स्कॉलरों ने अपने-अपने पोस्टर प्रस्तुत किए। विजेताओं के नामों का एलान आज किया जाएगा। इस दौरान ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रो. अनुराग शर्मा, प्रो. के मुरलीधर, प्रो. एन मुकुंदा, प्रो. यूरी एस किवशर, डॉ. खेहर सिंह, आयोजन समिति के समन्वयक प्रो. अनंथ रामाकृष्णा, आयोजन समिति के प्रो. जे रामकुमार आदि उपस्थित रहे।
प्रो. सुदर्शन के बारे में भी बताया
संगोष्ठी के दौरान भौतिक विज्ञान के बड़े वैज्ञानिकों में शुमार रहे प्रो. ईसीजी सुदर्शन के जीवनवृत्त पर व्याख्यान भी हुआ। प्रो. एन मुकुंदा ने प्रो. सुदर्शन के बारे में बताया कि दो बार नोबेल विजेताओं की सूची में उनका नाम था लेकिन नोबेल कमेटी के विवादित फैसले के चलते उन पर कोई फैसला नहीं हो पाया। इस दौरान प्रो. खेहर सिंह को विशिष्ट वैज्ञानिक अवॉर्ड भी दिया गया।