फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां मुर्दे के खाते से निकाले 15 लाख, डिप्टी मैनेजर सस्पेंड

Sat, 22 Sep 2018 11:01 AM IST
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

- एसबीआई की पीरोड शाखा में तैनाती के दौरान डिप्टी मैनेजर ने किया घपला, मौजूदा समय में जालौन की शाखा में है तैनात
- अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इनऑपरेटिव और मृतक खाते को बनाया ऑपरेटिव
विज्ञापन
डेमो पिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूपी के कानपुर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की पीरोड रोड शाखा में मुर्दे के खाते से 15 लाख रुपये निकाल लिए गए। खाताधारक की मौत के बाद से चार साल से ये खाता इनऑपरेटिव (जिस खाते में एक साल से लेन-देन न हुआ हो) था। डिप्टी मैनेजर अरुण त्रिपाठी ने इसे ऑपरेटिव खाता बनाकर घोटाला कर डाला। जांच के बाद आरोपी डिप्टी मैनेजर को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही उच्च स्तरीय जांच बैठा दी गई है।
विज्ञापन


पटकापुर निवासी पीके माथुर का खाता एसबीआई की बिरहाना रोड शाखा में था। वे अविवाहित थे और चार साल पहले उनकी मृत्यु हो चुकी थी। उनकी पेंशन बैंक के खाते में आती थी। परिवार में उनके भाई और अन्य सदस्य हैं। छह महीने पहले उनके भाई वीएम माथुर अपनी बेटी के साथ पासबुक और खाते के बारे में जानकारी के लिए बैंक पहुंचे थे। वहां उनसे उत्तराधिकार प्रमाण पत्र मांगा गया।

बैंक की ओर से बताया गया कि इनका एकाउंट अब पीरोड शाखा में जा चुका है और पीके माथुर ने ही इसे ट्रांसफर कराया था। इस पर परिवारीजन पीरोड शाखा गए तो पता चला कि इनके एकाउंट से धीरे-धीरे 15 लाख रुपये निकाले गए हैं। वीएम माथुर व अन्य परिजनों ने इससे इनकार किया तो मामला खुल गया। पूरे मामले की जांच बैंक की डिस्प्लनरी प्रोसीडिंग सेल ने की तो घपला सामने आया। 
विज्ञापन

 

डेमो पिक
ऐसे किया गया खेल
डिप्टी मैनेजर पहले बिरहाना रोड शाखा में तैनात था। बाद में इसका तबादला लाटूश रोड और फिर पी रोड हो गया। पी रोड शाखा में तैनाती के दौरान पूरा खेल किया गया। अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके किसी परिचित का खाता होने की बात कर डिप्टी मैनेजर ने खाता बिरहाना रोड शाखा से पी रोड ट्रांसफर करवाया। इसके बाद मृतक के हस्ताक्षर बदल कर नई चेक बुक जारी करवा ली। बाद में इसी चेक और प्रभाव का इस्तेमाल कर 15 लाख रुपये निकाल लिए।

इस तरह पकड़ा गया  
बैंक सूत्रों ने बताया कि कैशियर ने हर बार भुगतान के दौरान चेक के पीछे यह लिख दिया कि डिप्टी मैनेजर के कहने पर भुगतान किया जा रहा है। इसी के आधार पर डिप्टी मैनेजर का खेल पकड़ में आया। जब डिस्प्लनरी प्रोसीडिंग सेल ने मामले की जांच शुरू की तो पूरा मामला खुलता चला गया।  
विज्ञापन

आपके साथ न हो ठगी, इसलिए यह करें 

डेमो पिक
अगर आप बैंक में खाता खुलवाने जाए तो उसमें नॉमिनी का जिक्र जरूर कर दें। ऐसा न होने पर आगे चलकर खाताधारक के परिवार वालों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों के जानकार अधिवक्ता मनीष चतुर्वेदी ने बताया कि किस तरह खाता खुलवाते समय थोड़ी सी सावधानी बरतने से भविष्य में इस तरह की ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है। 

उन्होंने बताया कि नॉमिनी का फोटो इसमें जरूरी होता है। यदि किसी खाताधारक ने नॉमिनी नहीं बनाया है और संबंधित की मृत्यु हो जाती है तो रुपये लेने के लिए क्लेमेंट (जो दावा प्रस्तुत कर रहा है) की फोटो, एक रुपये का रसीदी टिकट, मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक की चेक बुक, पास बुक, एटीएम, क्लेमेंट की केवाईसी (आधार, पैन, बैंक की डिटेल), बैंक द्वारा दी गई बुकलेट जो पूरी तरह से भरी हुई हो, 100 रुपये का स्टांप बिना नोटरी का, जिस पर बंधक पत्र लिखा गया हो, परिवारिक सिजरा (तहसीलदार का बना हुआ) और यदि मृतक को पेंशन या वेतन कही से प्राप्त होता था तो संबंधित विभाग का एनओसी होना जरूरी है।

इसके अलावा लेटर ऑफ डिस्क्लेमर देना होगा जिसमें क्लेमेंट को  छोड़कर परिवार के सभी सदस्य हस्ताक्षर करेंगे और अपना पहचान प्रमाण पत्र भी देंगे। यदि पांच लाख रुपये से अधिक रकम है तो बैंक गारंट (जिनके पास निकाली जा रही है रकम) हो की गारंटी लगती है। पांच लाख से कम रकम होने पर इसकी जरूरत नही होती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें