इन्हें संदिग्ध की सूची में डालकर किसी भी प्रकार के दावे, अंशदान पर रोक लगा दी गई है। कानपुर में दो फर्जी कंपनियों के जरिये करीब 57 लाख रुपये पीएफ से निकाल लिए गए हैं। अन्य संदिग्ध मामलों की जांच चल रही है। अब विभाग के विजिलेंस ने जांच शुरू की है। पूरे उप्र और कानपुर रीजन में ऐसे मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है। अफसरों ने मामले से जुड़ी सभी फाइलें तलब की हैं।
ऐसे हुआ था फर्जीवाड़ा
दरअसल केंद्र सरकार ने कोरोना काल में लोगों की नौकरी बचाने के लिए कंपनी और कर्मचारी दोनों का ही पीएफ अंशदान खुद जमा किया था। इसका फायदा उठाकर कुछ लोगों ने फर्जी कंपनियां और कर्मचारियों को दिखाकर पीएफ हड़प लिया था। यह घोटाला कई हजार करोड़ का बताया जा रहा है।
घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था पीएफ इंस्पेक्टर
कार्यालय में 25 अप्रैल 2022 को सीबीआई ने छापा मारा था। इस दौरान स्कूल संचालक से तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते पीएफ इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव रंगे हाथ पकड़ा गया था। पीएफ इंस्पेक्टर जेल में है और कोलकाता कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। दरअसल चौबेपुर के स्कूल संचालक पर 7ए की कार्रवाई के तहत 50 लाख का जुर्माना किया गया था। इसे रफादफा करने के लिए ही तीन लाख घूस मांगी गई थी। अब इस मामले की भी जांच शुरू हो गई है।
निधि आपके निकट में आरोप लगा हंगामा
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय में सोमवार को निधि आपके निकट और पेंशन अदालत का आयोजन किया गया। लोगों ने आरोप लगाया कि नाम में संशोधन नहीं हो रहा है। इससे उनका पीएफ अंशदान नहीं जमा हो रहा है। दावा भुगतान रुक गया है। इससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। पराग डेरी और जेके जूट मिल के तमाम कर्मचारी भी पहुंचे और भुगतान न होने की बात कही। भरूआ सुमेरपुर से 14 कर्मचारी और श्रमिक पहुंचे और पीएफ भुगतान न होने पर नाराजगी जताई। कहा कि अगली बार काम नहीं हुआ तो आत्मदाह कर लेंगे। इस दौरान 86 मामले आए। इसमें 12 का मौके पर निस्तारण किया गया। 21 परिवेदन के मामले थे। अन्य मामले नाम संशोधन और भुगतान के थे।