कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआईसी) के दायरे में आने वाले लोगों को बहुत जल्द निजी अस्पतालों में सेकेंडरी मेडिकल केयर की सुविधाएं भी कैशलेस मिलने लगेंगी। सेकेंडरी मेडिकल केयर मतलब ऐसी बीमारी जिसमें स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और सुविधाओं की जरूरत पड़े।
अभी टर्शरी श्रेणी (ऐसी गंभीर बीमारी जिसके लिए सुपर स्पेशलिस्ट की जरूरत पड़े) के मरीजों को ही कैशलेस सुविधा मिलती है। आने वाले दो-तीन महीने में यह सुविधा शुरू हो सकती है। इससे प्रदेश के करीब 20 लाख और कानपुर शहर के करीब चार लाख कर्मचारियों और उनके परिवार वालों को लाभ मिलेगा।
राज्य बीमा योजना के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शरी तीन श्रेणियों में रखा जाता है। प्राइमरी मेडिकल केयर की सुविधाएं तो कर्मचारी राज्य बीमा योजना एवं श्रम चिकित्सा सेवाएं के अस्पतालों में ही निशुल्क मुहैया करा दी जाती हैं। कुछ रोगी ऐसे होते हैं जिन्हें स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की सेवाओं की जरूरत पड़ती है।
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सेकेंडरी मेडिकल केयर के लिए इन रोगियों को सरकारी जिला अस्पतालों और मेडिकल हॉस्पिटल में रेफर किया जाता है। जरूरत पड़ने पर इन्हें निजी अस्पतालों में भी भेजा जाता है। ऐसी स्थिति में रोगियों को जांचों, दवाओं आदि का खर्च पहले खुद वहन करना पड़ता है। बाद में बिल जमा करने पर भुगतान की व्यवस्था है।
अति गंभीर रोगी जिन्हें टर्शरी मेडिकल केयर की श्रेणी में रखा जाता है, उनके इलाज के लिए अस्पतालों में कैशलेस सुविधा का प्रावधान है। अब सेकेंडरी मेडिकल केयर की सुविधा भी कैशलेस होने जा रही है।
कर्मचारी राज्य बीमा योजना एवं श्रम चिकित्सा सेवाएं के निदेशक एसएमए रिजवी ने बताया कि शासन स्तर पर नीति निर्धारण हो रहा है। निजी अस्पतालों को जोड़ा जा रहा है। दो-तीन महीने में यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
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अस्पतालों को भी किया जा रहा अपडेट
कर्मचारी राज्य बीमा योजना एवं श्रम चिकित्सा सेवाएं के अस्पतालों में कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए डॉक्टरों और विशेषज्ञों के साथ ही सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। पब्लिक सर्विस कमीशन से 35 डॉक्टरों की नियुक्ति की जा रही है। इसके साथ ही 35 जनरल मेडिकल अफसर के साक्षात्कार हो चुके हैं। 17 विशेषज्ञ संविदा पर रखे गए हैं। बीमा योजना के प्रदेश में 10 अस्पताल हैं। इनमें पिछले साल ओपीडी में साढ़े सत्रह लाख मरीज पहुंचे थे।
ये कर्मचारी योजना के दायरे में
कर्मचारी जो ऐसी फैक्ट्री, कंपनी या फर्म में काम करते हैं, जहां 10 या इससे अधिक लोग काम करते हों वे इस ईएसआईसी की योजना के दायरे में आते हैं। हालांकि इनका वेतन (हाथ में आने वाला) 21 हजार रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। ऐसे कर्मचारियों और उनके परिवार के लोगों के इलाज का पूरा खर्च प्रदेश सरकार उठाती है। इसके लिए संस्था की ओर से कार्ड भी जारी किया जाता है।