शहर में 70 से ज्यादा मौसमी नर्सिंगहोेम हैं। ये बीमारियों वाले मौसम में खुलते हैं और बाद में बंद भी हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में फलफूल रहे मौसमी नर्सिंगहोमों पर एसीएमओ डॉ. आरके यादव चिंता तो जताते हैं, वहीं उन पर कार्रवाई के नाम पर सख्त कानून न होने की बात कहकर जिम्मेदारियों से पल्ला भी झाड़ लेते हैं।
शहर के कई इलाकाें में खुले मौसमी नर्सिंगहोमों में दलालों के सहारे मरीजों को हलाल किया जा रहा है। अंधेरगर्दी का आलम यह है कि अस्पताल संचालक ही डॉक्टर है और उनके कारखास पैरामेडिकल स्टाफ की भूमिका निभाते हैं। अप्रैल से संक्रामक बीमारियाें का हमला तेज होने की वजह से मौसमी नर्सिंगहोमों की तादात बढ़ जाती है। उल्टी-दस्त के मरीजों तक से ड्रिप चढ़ने के नाम पर हजारों रुपये वसूल लिए जाते हैं। सीरियस मरीज को निचोड़ने के बाद दूसरे अस्पतालों को रेफर करते हैं। सितंबर तक मरीजों को लूटने के बाद नर्सिंगहोमों में ताले लटक जाते हैं।