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यहां स्कूल में सूख रही मूंगफली और मक्का, बच्चों का हो रहा इंतजार

Sat, 01 Jul 2017 10:28 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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सरकारी स्कूलों का हाल किसी से नहीं छुपा है। कहीं स्कूलों में पढ़ाने को कभी शिक्षक नहीं होते तो कहीं स्कूल में बच्चे ही नहीं होते। ऐसा ही हाल कन्नौज के तालग्राम इलाके के स्कूलों में देखने को मिला। 
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गर्मी की छुट्टियों के बाद परिषदीय स्कूलों में शनिवार को शुरू हुए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। छात्र-छात्राओं की संख्या कम रही। अधिकतर स्कूलों में एमडीएम नहीं बना है, जबकि कुछ स्कूलों में दबंगों का कब्जा भी है। स्कूलों में साफ-सफाई की नहीं हुई। पुरानी किताब व पुरानी ड्रेस के सहारे कुछ बच्चे स्कूल पहुंचे।

 

कन्नौज के गधइया ऊसर में खेल रहे स्कूली बच्चे
प्राथमिक स्कूल चचियापुर
प्राथमिक स्कू्ल चचियापुर में कोई भी बच्चा पहले दिन 12 बजे तक स्कूल नहीं आया। शिक्षक व शिक्षिकाएं आपस में बातें कर रहे थे। परिसर में दबंगों की मूंगफली सूखती दिखाई दी। इस बाबत प्रधानाध्यापक ब्रजेंद्र कुमार ने बताया कि 74 बच्चे पंजीकृत हैं। कुछ बच्चे आए थे जो कि एमडीएम न बनने के कारण घर पर खाने चले गए हैं। ग्राम प्रधान ने कहने के बावजूद राशन नहीं भेजा। रसोइया भी चला गया है। गांव के कुछ लोगों ने मूंगफली कक्षाओं के बाहर लगा रखी थी। हटाने को कहने पर परिसर में फैला दी है। सफाई कर्मचारी के न आने से सफाई नहीं हो सकी है। शिक्षिका कल्पना व छुन्नी देवी मौजूद हैं।

गधइया ऊसर प्राथमिक स्कूल
शिक्षण सत्र के पहले दिन सुबह 11 बजे 15 बच्चे परिसर में खेलते नजर आए। पता चला कि प्रधानाध्यापक विनोद कुमार, सहायक अध्यापक ब्रजरमण व संदीप कक्षाओं के अंदर बैठे कागजात ठीक कर रहे थे। मौके पर महिला रसोइया मिड-डे-मील बनाती मिली।
 
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प्राथमिक स्कूल किस्तियापुर
पहले दिन बच्चे कक्षाओं में समय पर पढ़ते दिखाई दिए। प्रधानाध्यापक बख्तियार अहमद ने बताया कि पंजीकृत 39 बच्चों में 22 मौजूद हैं। पहला दिन है। दूसरे दिन से बच्चों की संख्या बढ़ेगी। बच्चों को घर से बुलाया जाएगा। सहायक अध्यापक तेजराम व राकेश कुमार कक्षा तीन चार के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अभी पुरानी किताबों से काम चलाया जा रहा है। ड्रेसों का वितरण नहीं हुआ है। शीघ्र वितरित कराएंगे।
इसी प्रकार छदामीपुरवा प्राथमिक स्कू्ल के प्रधानाध्यापक प्रभात कुमार अकेले मिले। दूसरे की तैनाती न होने के कारण बच्चे गोला बनाकर बैठे पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह कई बार दूसरे शिक्षक की मांग कर चुके हैं। अकेले पांच कक्षाओं को पढ़ाया जाना संभव नहीं है। इसी प्रकार क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल मस्तियापुर, गदोरा, चौतराहार, सिंगनापुर, नेपालपुर, अमोलर में अध्यापक तो मौजूद रहे लेकिन बच्चों की संख्या कम नजर आई।


 
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