बांग्लादेश भेजने के नाम पर डेढ़ करोड़ की कीमत के गेहूं घोटाले के मामले में कानपुर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन) थाने में 44 फर्म संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ कि फर्मों ने कागजों पर गेहूं की आपूर्ति बांग्लादेश में दिखाकर भुगतान हड़प लिया था। इसके बाद रेलबाजार स्थित ईओडब्ल्यू थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसमें धनकुट्टी बंबइया हाता निवासी हनुमान प्रसाद ओझा इस घोटाले का मास्टर माइंड बताया गया है।
ईओडब्ल्यू के एसपी बाबूराम के मुताबिक, वर्ष-2005 में अमर उजाला ने पांच करोड़ रुपये का खाद्यान्न बांग्लादेश भेजा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। मामले की जांच शासन ने 27 फरवरी 2006 को ईओडब्ल्यू को सौंपी थी। इंस्पेक्टर अशोक कुमार की जांच में खुलासा हुआ कि उरई रेलवे स्टेशन से निर्यातक फर्म ने सात रैक गेहूं और दो रैक चावल सितंबर से फरवरी-2004 के बीच फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बांग्लादेश को भेजा था। छानबीन में पता चला कि वर्ष-2004 में मेसर्स प्रियंका ओवरसीज, नई दिल्ली ने पांच रैक गेहूं उरई रेलवे स्टेशन से निर्यात करने जानकारी दी, लेकिन इसका भी कोई प्रमाण नहीं मिला। आयात-निर्यात का वैध लाइसेंस होने के बाद भी फर्म ने यह खेल कर दिया।
स्कूटर-बाइक को बता दिया ट्रक
रेलवे गोदाम से ले लिया वापस
फर्म को यह खाद्यान्न ब्रोकर फर्म धनकुट्टी बंबइया हाता निवासी हनुमान प्रसाद ओझा द्वारा तय रेट पर बांग्लादेश भेजना था। हनुमान ने विभिन्न जनपदों की 12 फर्मों से 1 करोड़ 44 लाख 64 हजार रुपये का लगभग 19167 क्विंटल गेहूं खरीदकर रेलवे स्टेशन उरई से भेजना दिखाया। लेकिन, उसने ऐसा नहीं किया। छानबीन में यह भी पता चला कि 11 फर्मों ने माल शहर के रेलवे स्टेशन के माल गोदाम पहुंचाया। इस बात को प्रभारी माल गोदाम ने प्रमाणित भी किया, लेकिन माल बांग्लादेश न जाकर कुछ दिन बाद घालमेल कर वापस ले लिया गया। माल कैसे बाहर निकला, इसका जवाब रेलवे के अफसर भी नहीं दे सके।
जानकारी कुछ, किया कुछ
इंस्पेक्टर ने बताया कि बड़ी मात्रा में गेहूं प्रियंका ओवरसीज के नाम से भेजने की जानकारी दी गई। लेकिन, पूरा गेहूं बांग्लादेश नहीं पहुंचा। शहर के विनोबा नगर की फर्म प्रज्ञा ट्रेडिंग की तरफ से 87.50 लाख कीमत का 11604 क्विंटल गेहूं उरई से कागजों पर ही लोड दिखा दिया गया। इसके बाद जब ब्रोकर और उसके सहयोगियों से 19167 क्विंटल गेहूं कहां से और कब खरीदा, किस वाहन से उरई पहुंचाया, इस बारे में कोई जवाब नहीं मिला।
इंस्पेक्टर ने बताया कि ब्रोकर हनुमान प्रसाद ओझा समेत 44 लोग घोटाले में शामिल हैं। वे ट्रक नंबर भी फर्जी हैं, जिनसे माल रेलवे स्टेशन ले जाना दर्शाया गया। आरटीओ से पता चला कि जो नंबर ट्रकों के बताए गए हैं, वो स्कूटर व बाइक के हैं। इन सुबूतों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। इंस्पेक्टर डीके वर्मा विवेचना के साथ ही आरोपियों की तलाश भी कर रहे हैं।