बुरी नीयत से पीछा किए जाने पर दलित महिला को एक लाख रुपये मुआवजा मिलेगा। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण नियमावली में केंद्र सरकार द्वारा संशोधन में किए गए प्रावधानों में यह शामिल है। इसके प्रचार के लिए पर्चे बांटे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव नजदीक देख भाजपा सरकार दलितों को रिझाने के लिए उनके हित में किए गए काम बता रही है।
एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून के तहत तत्काल एफआईआर और गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव कर दिया था। अब बिना जांच के रिपोर्ट दर्ज हो सकेगी और विवेचक चाहेगा तो गिरफ्तारी भी हो सकेगी। केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियमावली 1995 में संशोधन किए थे। इसमें दलितों के उत्पीड़न पर मुआवजा देने के और प्रावधान किए गए थे। अब चुनाव नजदीक आते देख इन प्रावधानों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग की ओर से बांटे जा रहे पर्चे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के चेयरमैन बृजलाल की फोटो छपी है। इसके साथ ही संशोधन के प्रावधान दिए गए हैं।
डेमो पिक
कुछ अपराध और उनमें मुआवजा
1- नग्न या अर्धनग्न घुमाने पर एक लाख रुपये
2- बलपूर्वक कपड़े उतरवाना, मुंडन कराना, मूंछे हटाना, चेहरे या शरीर को पोतने पर एक लाख रुपये
3- डायन होना या जादू-टोना करने का आरोप लगाने से शारीरिक क्षति या मानसिक अपहानि पर एक लाख रुपये
4- सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार करने या धमकी देने पर एक लाख रुपये
5- अनुसूचित जाति/जन जाति की महिला का बुरी नीयत से पीछा करने पर एक लाख रुपये
6- मतदान करने या चुनाव लड़ने के लिए पर्चा भरने से रोकने पर 85 हजार रुपये
7- दलित स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला करना या आपराधिक बल प्रयोग करने पर दो लाख रुपये
8- सार्वजनिक स्थानों पर साइकिल, बाइक चलाने, नए कपड़े पहनने, बारात निकालने, बारात के दौरान घोड़े पर बैठने से रोकने पर एक लाख रुपये