जमीयत उलेमा हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक उसामा कासमी
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हरदोई में जमीयत उलेमा हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक उसामा कासमी ने कहा कि जमीयत और आरएसएस प्रमुख की मुलाकात को सकारात्मक नजर से देखना चाहिए। इससे पूर्व भी मेल मिलाप की ऐसी कोशिशें होती रही हैं और आगे भी होती रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी दूर करना और नौकरियां बचाना भी राष्ट्रवाद है। एक धार्मिक कार्यक्रम में शिरकत के बाद हाफिज सलीमुल्लाह के आवास पर पत्रकारों से वार्ता में मौलाना मतीनुल ने कहा कि अवाम के बीच की दूरियां कम करने में जमीयत और आरएसएस अहम रोल अदा कर सकते हैं।
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दोनों संगठनों के प्रमुखों की मुलाकात में कोई नुकसान नहीं है। पूर्व में हुई ऐसी कोशिशों के बेहतर नतीजे मिले थे। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि कश्मीर भारत का हिस्सा है, लेकिन वहां का मसला बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि अवाम को भरोसे में लिए बिना बड़ा फैसला ले लिया।
उन्होंने तीन तलाक कानून को औरतों के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला बताया। कहा कि कोर्ट कचहरी के बजाय शरई अदालतों से संपर्क करना चाहिए। मजहबी और घरेलू मामले अदालतों से बाहर हल हो जाएं तो बेहतर है। उन्होंने मिशन चंद्रयान 2 पर भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई दी।
कहा कि असम में समान नागरिक कोड के बाबत सरकार की नीयत साफ नहीं लगती। देश में विभिन्न मुद्दों पर भीड़ हिंसक हो रही है। सरकार को इस पर संजीदगी से गौर कर मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त कानून बनाना चाहिए। इस मौके पर हाफिज सलीमुल्लाह, हफीज मंसूरी, मुईनुद्दीन अंसारी, कारी अब्दुल मुईद, मौलाना अनीस, हातिम, मौलवी वासित, शिबली नोमानी शुएब खान आदि मौजूद थे।