सोमवार यानी 11 मई को शनि चाल बदलते हुए वक्री हो जाएंगे। शनि की यह वक्री चाल 142 दिनों तक रहेगी। 29 सितंबर से शनि वक्री से फिर मार्गी हो जाएंगे। इसका कई राशियों पर असर पड़ेगा। 13 मई को शुक्र वृषभ राशि में वक्री होगा। ये दोनों ग्रह अपनी-अपनी राशि में वक्री रहेंगे। ज्योतिषियों की मानें तो आगामी 18 जून से 25 जून तक छह ग्रह वक्री रहेंगे।
यह दुर्लभ संयोग होगा। ऐसे में दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी का असर कम हो सकता है। ज्योतिषी केए दुबे पद्मेश और आचार्य मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिषशास्त्र में शनि को न्याय का कारक ग्रह माना जाता है। शनि के वक्री होने का सबसे अधिक असर उन राशि के जातकों पर पड़ेगा जिन राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही होगी।
अगर आपकी कुंडली में शनि अशुभ भाव में बैठा है तब जातक को कष्ट मिलेगा। अगर कुंडली में शनि शुभ भाव में है तो अशुभ असर नहीं देखने को मिलेगा। बताया कि राहु-केतु छाया ग्रह माने गए हैं। ये हमेशा वक्री ही रहते हैं। राहु-केतु क्रमश: मिथुन और धनु में वक्री हैं।
सूर्य और चंद्र हमेशा मार्गी रहते हैं। 14 मई को गुरु भी वक्री हो रहा है। ये अपनी नीच राशि मकर में शनि के साथ स्थित है। इसके बाद लगातार 34 दिनों तक गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु ये 5 ग्रह वक्री रहेंगे। 18 जून को बुध भी मिथुन राशि में वक्री हो जाएंगे। इस तरह छह ग्रह वक्री हो जाएंगे।