कानपुर में पुलिस के लिए संजीत यादव अपहरण कांड पहेली बनता जा रहा है। एक दर्जन लोगों से पूछताछ के बाद भी पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। संजीत के अपहरण के 26 दिन बाद भी जांच-पड़ताल में लगीं टीमें अंधेरे में तीर चला रही हैं।
परिजन अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने की चेतावनी दे रहे हैं। बर्रा पांच निवासी चमन सिंह यादव का इकलौता बेटा संजीत कुमार 22 जून की शाम लापता हो गया था। परिजनों ने बर्रा विश्वबैंक निवासी राहुल यादव पर बेटे का अपहरण करने का आरोप लगा तहरीर दी थी।
पुलिस ने राहुल को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, तभी 29 जून की शाम पिता को फोन कर अपहर्ता ने 30 लाख की फिरौती मांगी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस के कहने पर पैसों का इंतजाम कर 13 जुलाई की रात गुजैनी पुल से फिरौती की रकम नीचे फेंकी, जिसे लेकर अपहर्ता फरार हो गए। इस घटना को 120 घंटे बीत चुके हैं। शनिवार को संजीत की कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस 12 लोगों से पूछताछ की। इसके बावजूद न संजीत और न ही अपहर्ताओं का सुराग लग सका है।
संजीत के दोस्तों के दर्ज किए बयान
नौबस्ता स्थित प्राइवेट अस्पताल में दस हजार रुपये प्रति माह सैलरी पर संजीत काम कर रहा था। शनिवार को पुलिस ने अस्पताल में काम करने वाले उसके दोस्तों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। दोस्तों ने बताया कि संजीत ने नैनीताल बैंक से करीब दो लाख रुपये का लोन ले रखा था। करीब 1.92 लाख रुपये का उसे भुगतान करना था। समय से न चुका पाने के कारण बैंक उस पर दबाव बना रही थी।
दोस्तों ने बताया कि वे कभी-कभी पार्टी करने के लिए बर्रा दो संकट मोचन हनुमान मंदिर के पास स्थित एक ढाबे में जाते थे। वारदात के करीब तीन-चार दिन पहले से संजीत ने उनके साथ ढाबे जाना बंद कर दिया था। कारगिल पेट्रोल पंप के पास स्थित मुस्कान ढाबे में संजीत की लोकेशन मिलने की बात पर बताया कि वे लोग उस ढाबे पर कभी नहीं जाते थे। संजीत उस दिन किसी के बुलाने पर ही मुस्कान ढाबे पर गया था।