कानपुर में संवासिनी गृह में सात युवतियों के गर्भवती होने के प्रकरण पर सभी तथ्यों को शासन और प्रशासन की तरफ से स्पष्ट करने के बावजूद इस मामले को लेकर विरोध कम नहीं हो रहा है। महिला संगठन और राजनीतिज्ञों की तरफ से भी लगातार इस मामले को उठाकर व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
महिला संगठनों की मांग है कि इस मामले की तह तक जांच की जाए और सभी महिलाओं की सुरक्षा की जाए। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की तरफ से लगातार दूसरे दिन भी सवाल खड़े किए गए। समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली ने मंडलायुक्त डॉ सुधीर एम बोबडे को पत्र भेजकर सवाल भी उठाया है और अनुरोध भी किया है।
उनका कहना है कि आश्रय घर की सफाई और संवासिनियों की देखभाल में बहुत कमी रही है। अगर सात गर्भवती संवासिनी बलात्कार की शिकार होने के बाद यहां लाई गईं तो क्या गर्भपात का आप्शन उन्हें दिया गया था जो उनका कानूनी अधिकार है।
इन गर्भवती संवासिनियों के स्वास्थ्य को लेकर प्रबंधकों ने क्या किया। क्योंकि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अब पता चला है कि एक एचआईवी प्लस और एक संवासिनी हेपेटाइटिस सी प्लस है। उनकी मांग है कि इन परिस्थितियों में मौजूदा प्रबंधकों को हटाया जाना चाहिए।