कानपुर में गोविंदनगर स्थित श्री मुनि इंटर कॉलेज में हुए वेतन घोटाले में क्राइम ब्रांच की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में एक करोड़ रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई है। एक बाबू समेत तीन कर्मचारियों की भूमिका अहम पाई गई है।
इनमें एक महिला कर्मचारी है। इन कर्मचारियों के साथ-साथ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले कॉलेज के प्रशासनिक अफसर भी फंसेंगे। सोमवार को क्राइम ब्रांच दफ्तर में वादी और आरोपियों के बयान दर्ज होंगे।
एक बाबू और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने फर्जीवाड़ा कर अपना वेतन बढ़ा लिया था। 2012 से यह खेल चल रहा था। पिछले साल जनवरी में घोटाला सामने आया था। डीआईओएस ने गोविंद नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
तब करीब 73 लाख रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी। केस की जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हो गई थी। क्राइम ब्रांच के एक अफसर ने बताया कि घोटाले की रकम एक करोड़ होने की पुष्टि हुई है।
इसमें कॉलेज के बाबू अविनाश, चपरासी बिहारी लाल और राजेश्वरी की मुख्य भूमिका पाई गई है। इन्होंने खाते खुलवाकर रकम जमा की है। एसपी क्राइम डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि वादी और आरोपियों को सोमवार को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है।
बाबू ने किया खेल, अफसरों ने आंख बंद कर किए दस्तखत
क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि बाबू अविनाश ने दो खाते खुलवाए थे, वहीं राजेश्वरी व बिहारी लाल ने एक-एक खाता खुलवाया था। बाबू ने फर्जीवाड़ा किया और दस्तावेजों में हेरफर किया। उन्हीं दस्तावेजों के सहारे अफसरों से वेतन पास करवा लिया। अफसर बगैर जांच पड़ताल के हस्ताक्षर करते रहे। वेतन की रकम अपने-अपने खातों में जमा करते रहे। क्राइम ब्रांच ने बैंक से इससे संबंधित सभी दस्तावेज ले लिए हैं। ये आरोपियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य हैं।