थाना क्षेत्र के ग्राम पांडेयपुर निवासी योगेंद्र सिंह की पुत्री साक्षी देवी (16) फिरोजपुर स्थित कृष्णा इंटर कॉलेज की छात्रा थी। यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा में छह को कला और सात मार्च को अंतिम पेपर सामाजिक विज्ञान का था। साक्षी दोनों पेपरों से संतुष्ट नहीं थी। इसी कारण परीक्षा के बाद ही वह अवसाद में रहने लगी। पिता योगेंद्र सिंह उसका कानपुर में उपचार भी करा रहे थे।
स्कूल में भी टॉपर से दूसरे नंबर पर चली गई
20 अप्रैल को आए परीक्षा के परिणाम में साक्षी के कला में 91 और सामाजिक विज्ञान में 94 नंबर थे। वहीं, अंग्रेजी में 96 और अन्य तीनों विषयों में 97-97 अंक अर्जित किए। उसका रिजल्ट 95.3 प्रतिशत बना, जबकि दोनों में अन्य विषयों के बराबर नंबर आते, तो प्रतिशत 96 से 97 प्रतिशत के बीच हो जाता। साक्षी प्रदेश की टॉपर सूची में स्थान न मिलने का कारण दोनों विषयों में कम नंबर आने को ही मान रही थी। वहीं, स्कूल में भी टॉपर से दूसरे नंबर पर चली गई।
पिता का हाथ बंटाने पहुंची थी खेत
पिता योगेंद्र सिंह ने बताया कि वह सोमवार को खेत में भूसा भरने गए थे। बेटी साक्षी भी काम में हाथ बंटाने पहुंची थी। उसने बेटी को आराम करने के लिए कहते हुए घर भेजा था। वह शाम पांच बजे घर पहुंच गई थी। पिता ने बताया कि बेटी कम नंबर आने से हताश थी।
मां बोली- डॉक्टर बनना चाहती थी बेटी
उसने ढाढ़स बंधाया था और आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया था। बेटी को गणित संकाय से 11वीं में कृष्णा इंटर कॉलेज में प्रवेश दिलाया था। मां विमला देवी उर्फ कमलेशा ने बताया कि बेटी डॉक्टर बनना चाहती थी। छोटा बेटा चीकू घाटमपुर के मुरलीपुर में कक्षा सातवीं की पढ़ाई कर रहा है।
चार दिन गई स्कूल
साक्षी के क्लास टीचर रामनरेश ने बताया कि साक्षी ने 11वीं में 23 अप्रैल को प्रवेश लिया था। 26, 29 और 30 अप्रैल को वह कुल चार दिन स्कूल आई। मई में एक दिन भी स्कूल नहीं आई। बीमारी की वजह से ज्यादा पूछताछ नहीं की गई। साक्षी जिज्ञासु प्रवृत्ति और शांत स्वभाव की लड़की थी।
साक्षी की खबर पर कुमार विश्वास ने की पोस्ट
कुमार विश्वास ने एक्स पर छात्रा साक्षी मौत पर पोस्ट डाली है। उन्होंने लिखा है कि प्रिय अभिभावकों, अध्यापकों और प्राप्तांक से मेधा-प्रतिभा व सफलता तय करने वाले औसत-बुद्धि सामाजिक टिप्पणीकारो! अपने असफल सपनों का बोझ मासूम बच्चों की स्वप्नदर्शी पलकों पर मत लादो। दुनिया को थोड़ा जीने भी दो यार।