इटावा में सैफई के ध्यानचंद स्पोर्ट्स कॉलेज में शनिवार को राज्य बाल आयोग टीम की सदस्य जया सिंह और साक्षी बैजल पहुंचीं और उन्होंने बैडमिंटन खिलाड़ी सलोनी की मौत के मामले में जांच शुरू की। टीम ने मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी, जिलाधिकारी, फोरेंसिक टीम से मुलाकात की।
इसके साथ जेल में बंद यामिनी से भी पूछताछ की। इस सबके बाद टीम ने अधिकारियों को जांच को ठीेक से करने की सलाह दी है। बाल आयोग की जया सिंह ने बताया कि उन्होंने छह घंटे सैफई में बिताने हैं। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले सलोनी मामले की जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर वासुदेव सिंह से मुलाकात की और जांच के बारे में पूरी जानकारी ली।
इसके बाद मामले से जुड़े हुए तमाम लोगों से पूछताछ की। साथ ही स्पोर्ट्स कॉलेज में सलोनी के हॉस्टल में रहने वाली कोच पारुल, हॉस्टल की वार्डन मीतू और किशोरी की तमाम परिचित लड़कियों से पूछताछ की। यहीं नहीं जेल में बंद यामिनी से भी जानकारी की। बाल आयोग की टीम ने पाया कि इस मामले में अभी ठीक से जांच की जरूरत है क्योंकि जांच के दौरान कई पहलुओं को छोड़ दिया गया है।
मरने वाली लड़की सलोनी के पिता का आरोप है कि पुलिस ने पूरी तरह से सबूत नहीं जुटाए हैं, क्योंकि सलोनी को डायरी लिखने की आदत थी और पुलिस ने अपनी जांच में कमरे से कोई डायरी बरामद नहीं की। कालेज प्रशासन की तरफ से सुसाइड नोट की राइटिंग का पुलिस अभी तक मिलान नही कर सकी, क्योंकि कॉलेज प्रशासन की तरफ से अभी तक सलोनी की हैंड राइटिंग की कॉपी पुलिस को नहीं दी गई।
बाल आयोग की टीम ने सभी बिंदुओं पर जांच की। आरोपी यामिनी का भी पक्ष लिया गया। बाल अयोग अपनी तरफ से एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है जो कि फोरेंसिक रिपोर्ट आने और पुलिस द्वारा छूटे हुए बयान और जांच पूरी होने के बाद शासन को भेजी जाएगी।
ये है मामला
दरअसल, यह मामला 22 जुलाई की रात का है। अगले दिन सुबह लड़कियां सलोनी को जगाने के लिए गई तो सलोनी का शव हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला था। किशोरी की मौत के बारे में परिवार वालों ने हत्या की आशंका जताई है। किशोरी के कमरे में उस वक्त दो लड़कियां और सो रही थीं, लेकिन जांच के मुताबिक उन लड़कियों को घटना के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया।
जांच में पाया गया कि किशोरी ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा था। पुलिस ने इसी सुसाइड नोट के आधार पर यामिनी को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया। राज्य बाल आयोग के अध्यक्ष ने जांच के लिए टीम गठित की। इसके बाद बाल आयोग की टीम जांच करने पहुंची।