एसएएफ ने लांच की नई रिवाल्वर, आज से बुकिंग
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लघु शस्त्र निर्माणी (एसएएफ) ने .32 कैलिबर वाली नई रिवाल्वर प्रहार को शुक्रवार को लांच किया। 50 मीटर की दूरी तक मार करने वाली रिवाल्वर को आधुनिक डिजाइन के साथ विकसित किया गया है। दो मॉडलों में लांच हुई इस रिवाल्वर को अंतरराष्ट्रीय रिवाल्वर वेब्ले एंड स्काट से प्रतिस्पर्धात्मक बताया जा रहा है। नई रिवाल्वर की कीमत डीलरों के लिए 71 हजार रखी गई है।
28 फीसदी जीएसटी इसमें अलग से लगेगा। शनिवार से इसकी बुकिंग शुरू हो जाएगी। आयोजित कार्यक्रम में निर्माणी के महाप्रबंधक एके मौर्य ने बताया कि ग्राहकों की डिमांड और उनके फीडबैक के आधार पर नई रिवाल्वर बनाई गई है। इसका लुक बेहतर है। ग्रिप वुडेन और प्लास्टिक में है। रिवाल्वर का भार 750 ग्राम है। इसमें खास सिरैमिक पेंट किया गया है। दोहरी सेराकोटेड सतह की गई है।
काली और टाइटेनियम में इसके सिलिंडर बनाए गए हैं। निर्माणी के अधिकारी पवन कुमार, जिन्होंने लंदन की क्रेनफील्ड विश्वविद्यालय के डीसीएम कॉलेज से डिजाइन में एमएससी किया है, उन्हीं ने इसका डिजाइन तैयार किया है। रिवाल्वर की ओवरऑल लेंथ 177.6 एमएम है।
.32 कैलिबर वाली नई रिवाल्वर प्रहार
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रिवाल्वर का हर मौसम और सभी तरह की परिस्थितियों में ट्रायल किया गया है जिसमें रिवाल्वर खरी उतरी है। माइनस 30 डिग्री से लेकर 55 डिग्री तापमान पर रिवाल्वर का ट्रायल किया गया है। लांचिंग कार्यक्रम के दौरान अपर महाप्रबंधक तुषार त्रिपाठी, रोली वर्मा, संयुक्त महाप्रबंधक आलोक वाजपेयी, पवन कुमार, कार्यप्रबंधक आरके मिश्रा के अलावा अभय मिश्रा व तमाम डीलर मौजूद रहे।
निर्माणी में बनेंगे एके 203 राइफल के उपकरण
महाप्रबंधक ने बताया कि रूस और आयुध निर्माणी कोरबा के संयुक्त उपक्रम एके 203 राइफल के कई उपकरण निर्माणी में बनेंगे। अभी कंपनी के बीच समझौता होना बाकी है। इसके अलावा ज्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कारबाइन जेवीपीसी हर प्रकार के ट्रायल में सफल हो चुकी है। आर्मी और अन्य सैन्य बलों से जल्द अच्छे आर्डर मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा निर्माणी की बेल्ट फेल्ड लाइट मशीनगन तकनीक बिड में सफल हो चुकी है।
इसके यूजर ट्रायल इसी महीने शुरू होंगे। बताया कि एनसीजी कमांडो के लिए कॉम्बैट राइफल सीक्यूबी भी बनाया जाएगा। इसके लिए तीन मॉडल डिजाइन किए गए हैं। जल्द ही इनके प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे। महाप्रबंधक ने बताया कि पीपीई किट परीक्षण के लिए सात हजार आवेदन आए थे जिसमें बेहद कम संख्या में उत्पाद परीक्षण में पास हो पाए थे। लोग बिना जानकारी के लिए पीपीई किट बनाने लग गए थे।