कानपुर देहात। अकबरपुर में डेढ़ करोड़ की लागत से बन कर तैयार हुए सिटी बस स्टैंड से परिवहन व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद जगी थी, एक सितंबर से कानपुर होकर लखनऊ जाने के लिए चार रोडवेज की बसें भी संचालित कर दी गईं, लेकिन इसके बाद भी परिवहन व्यवस्था बेपटरी है। इसके पीछे के कारण है कि सालों से चल रही 28 सीएनजी बसें मियाद पूरी करने के कारण बंद कर दी गई हैं। अब रूरा, अकबरपुर वासियों के लिए रोडवेज की चार बसें ही सहारा हैं।
सिटी बस चलने से रूरा के लोग आसानी से अकबरपुर व जिला मुख्यालय पहुंच जाते थे। वहीं, अकबरपुर से कानपुर जाने के लिए लोगों को काफी सहूलियत थी। अकबरपुर से हर आधे घंटे में बस मिलने पर दैनिक यात्रियों के अलावा, छात्र, व्यापार के सिलसिले से आने जाने वाले व्यापारी सुरक्षित सफर करते थे। सबसे ज्यादा सुविधा सुबह नौकरी करने के लिए कलक्ट्रेट, कचहरी, मेडिकल कॉलेज व अन्य सरकारी दफ्तरों में आने वाले लोगों को थी। इन्हीं बस से लोग वापस भी चले जाते थे। इस तरह सुबह से लेकर शाम तक 500 से अधिक लोग सफर करते थे।
सितंबर माह की शुरुआत से अक्तूबर के पहले सप्ताह तक धीरे-धीरे कर सभी 28 सिटी बंद कर दी गई हैं। अब रूरा से अकबरपुर आने व अकबरपुर से कानपुर जाने के लिए कोई सीधा व सुरक्षित साधन नहीं है। ऑटो व अन्य डग्गामार वाहन अधिक किराया वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर चलने पर सफर भी खतरों भरा है। दैनिक यात्रियों के साथ व्यापारी वर्ग काफी परेशान है। इसको लेकर बसें चलाए जाने की मांग उठने लगी हैं। वहीं जिम्मेदार भी अभी तक परिवहन व्यवस्था पहले से बेहतर करने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बना सकें।
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दिन भर में चार रोडवेज बसें, शाम को वह भी नहीं
अकबरपुर बस अड्डा भले ही पूरी तरह से गुलजार नहीं हो सका है। मगर परिवहन निगम ने चार बसे कानपुर होते हुए लखनऊ के लिए चला रहा है। यह बसें अकबरपुर बस स्टैंड के पास रुकने के बाद सवारियां लेकर जाती हैं। मगर बस अड्डे पर नहीं खड़ी होती। इनमें से पहली बस अपराह्न 11:00 बजे, दूसरी बस दोपहर 12 बजे, तीसरी बस दोपहर एक बजे, चौथी बस दोपहर दो बजे हैं। मगर शाम के समय के पांच बजे के बाद से ही सन्नाटा छा जाता है और कानपुर के लिए कोई सीधा साधन नहीं है। इससे लोग मजबूरन डग्गामार वाहनों का सहारा ले रहे हैं।
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अन्य डिपो की बसें रुकें तो हो सहूलियत
जून माह में अकबरपुर बस अड्डा का लोकार्पण किया गया था। इसके बाद से कानपुर, उरई, इटावा, आगरा अन्य डिपो की बसों को अकबरपुर बस अड्डा में रोकने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं कराया जा सका है। अकबरपुर के व्यापारी दिलीप ओमर, सुशील कौशल, राजकरन सिंह आदि का कहना है कि अन्य डिपो की बसें आकर रुकें तो सहूलियत होगी।
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घंटों करना पड़ रहा इंतजार, फिर भी सुरक्षित नहीं सफर
रोजाना कानपुर कचहरी आना जाना रहता है। सिटी बसें चलने से सुबह किसी भी समय ओवरब्रिज के पास पहुंचने पर बस मिल जाती थी। एक घंटे में कानपुर पहुंच जाते थे, किराया भी कम था और सफर भी सुरक्षित था, लेकिन अब घंटों इंतजार करना पड़ता है। रोजवेज की जो बस चल रही है वह भी 11 बजे आती है, जिससे जाना बेमकसद साबित होता है। - राजेंद्र गुप्ता, एडवोकेट अकबरपुर
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व्यापार के सिलसिले में अक्सर कानपुर जाना पड़ता है। रात के समय लौटने में परेशानी नहीं होती थी। अब किसी तरह पहुंच जाते हैं, लेकिन रात को वापसी करने में परेशानी होती है। इसका कारण है सिटी बसें बंद हो गई हैं। सिटी बस संचालन की मांग की जा रही है। जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अधिकारियों को इसके लिए पहल करनी चाहिए। - दिलीप ओमर, किराना व्यापारी, अकबरपुर।
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वर्जन.............
अकबरपुर से कानपुर होते हुए लखनऊ तक माती डिपो की चार बसें चलाई जा रही हैं। एक बस सुबह बिल्हौर से चलती है, जो रसूलाबाद, रूरा होते हुए आती है। डेरापुर से लखनऊ, मंगलपुर से लखनऊ, झींझक से लखनऊ भी रोडवेज की बस चल रही है। अन्य रूट की बसें अकबरपुर बस अड्डा पर आकर रुकें इसके लिए पहल की जा रही है। लोड फैक्टर बढ़ने पर बसें भी बढ़ाई जाएंगी।
- मोहम्मद अशफाक, एआरएम, माती डिपो