कानपुर। आईआईटी में छात्रों की आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। संस्थान प्रशासन की ओर से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास करने के दावों के बीच बीटेक छात्र जयसिंह मीणा की आत्महत्या और 12 घंटे तक संस्थान को इसकी जानकारी न होना व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है।
मामले में कल्याणपुर केशवपुरम निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज कुमार सिंह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आईआईटी प्रशासन केवल कागजों पर ही छात्र कल्याण की योजनाओं को चलाकर आयोग को गुमराह कर रहा है।
2024 में एक ही महीने में तीन आईआईटी छात्र-छात्राओं की मौत के बाद भी पंकज कुमार सिंह ने एनएचआरसी में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके जवाब में आईआईटी प्रशासन ने 18 बिंदुओं पर एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें आत्महत्याओं को रोकने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख किया गया था।
हालांकि कुछ माह पहले छात्र धीरज सैनी के खुदकुशी करने और तीन दिन तक फंदे पर लटके शव की किसी को भनक तक न लगने पर आईआईटी प्रशासन पर दोबारा सवाल उठे थे। आईआईटी की रिपोर्ट पर पंकज ने एनएचआरसी में आपत्ति जताई थी, जिसके बाद आयोग ने आईआईटी प्रशासन से 22 जनवरी तक जवाब मांगा है।
इसी बीच सोमवार को जयसिंह मीणा की आत्महत्या की घटना सामने आई। मंगलवार को पंकज ने इससे संबंधित समाचार पत्रों की प्रतियों के साथ एक शिकायती पत्र एनएचआरसी को भेजा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब छात्र ने पहले नस काटने की कोशिश की थी तब भी आईआईटी प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं हुई।
बाद में जब छात्र ने फांसी लगा ली तब भी संस्थान को तत्काल घटना की सूचना नहीं मिली। यह तब हुआ जब छात्र के घरवालों ने दोस्तों से संपर्क किया, जिसके बाद उन्होंने आईआईटी प्रशासन को घटना की सूचना दी। आत्महत्याओं को रोक पाना तो दूर, कई घंटों तक ऐसी गंभीर घटनाओं की जानकारी तक न होना, आईआईटी की व्यवस्था में एक बड़ी खामी को दर्शाता है।