सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और संघ प्रमुख मोहन भागवत
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अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में होने वाले विधान सभा चुनाव में भाजपा की फिर वापसी के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ रणनीति में जुट गया है। संघ की यहां चल रही पांच दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन बैठक में चौथे दिन सोमवार को सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश में यह जिम्मा आरएसएस के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार को सौंपा गया है।
संघ का मानना है कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों का संदेश पूरे देश में जाता है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश के साथ पांच राज्यों के भी चुनाव हैं। ऐसे में संघ नेतृत्व उत्तर प्रदेश को लेकर पूरी तरह संजीदा है।
हालांकि, संघ किसी भी राजनीतिक पदाधिकारियों से अपना संबंध न रखने की बात कहता है, लेकिन अंदरूनी तौर पर अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा के लिए संघ का रुझान रहता है। राष्ट्रीय चिंतन बैठक में रामजन्म भूमि न्यास द्वारा मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई भूमि में उठे विवाद के बाद इस ट्रस्ट पर भी संघ ने अपनी निगाहें गड़ा दी हैं।
ट्रस्ट महामंत्री चंपत राय दो दिन इस बैठक में शामिल रहे। संघ नेतृत्व के सामने उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी सफाई पेश की, लेकिन यह चर्चा अभी भी गरम है कि रामजन्म भूमि न्यास ट्रस्ट के पदाधिकारियों के कामों में बदलाव हो सकता है।