सुजय देसाई पर लगा आरोप न सिर्फ समाज बल्कि जनता की अंतर-आत्मा को झकझोरने वाला है। उसे जमानत नहीं दी जा सकती। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने लगभग 7800 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोपी कारोबारी सुजय देसाई की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने ट्रायल कोर्ट (विशेष न्यायालय) को भी मामले का जल्द निस्तारण करने, संभव हो तो छह माह में मुकदमे में फैसला सुनाने के निर्देश दिए हैं। सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस की ओर से तर्क रखा गया कि सुजय देसाई फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर व सीईओ हैं।
उन्होंने मर्चेंटिंग ट्रेड के कारोबार में विभिन्न बैंकों को फर्जी कागजात देकर लेटर ऑफ क्रेडिट के माध्यम से क्रेडिट सुविधा ली और घपला कर सरकारी बैंकों को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया। सिर्फ एफआईएल कंपनी पर 4041 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है, जबकि सभी सह अभियुक्तों ने मिलकर बैंकों को कुल 7820 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है।
वहीं सुजय के अधिवक्ता का तर्क था कि कोई अपराध नहीं किया है। जांच एजेंसी का सहयोग कर रहे हैं। एसएफआईओ जांच पूरी कर चुकी है और पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है। गवाहों की संख्या भी चार्जशीट में दी जा चुकी है। कई गवाह विदेश में रहते हैं। ऐसे में मुकदमे का जल्द निस्तारण संभव नहीं है।