कानपुर। अगर डकार लेने या सोेते वक्त पेट का एसिड मुंह तक आ जाता है तो इसे सामान्य न समझें विशेषज्ञ को दिखाएं। यह स्थिति बार-बार होने से खाने की नली में सिकुड़न आ सकती है और कैंसर का खतरा रहता है। यह बात शनिवार रात आईएमए भवन में आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में बताई गई। सीएमई का आयोजन गैस्ट्रो इसोफेजियल रिफ्लैक्स डिजीज (गर्ड) पर किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. पुनीत पुरी ने बताया कि अमाशय में बना एसिड और खाना वापस मुंह में आने की दिक्कत से रोगी की छाती में जलन महसूस होती है। कुछ रोगियों को लगातार खांसी बनी रहती है। सीने में दर्द होता है। अनजाने में रोगी चेस्ट फिजीशियन और कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह लेते हैं। लंबे समय तक गर्ड रहने से खाने की नली में रुकावट अथवा कैंसर भी बन जाता है। लैप्रोस्कोपिक एंटी रिफ्लैकस सर्जरी इसे ठीक किया जा सकता है। दवा से कुछ देर का आराम रहता है। चेयरपर्सन डॉ. पीयूष मिश्रा और डॉ. बृजेंद्र सिंह रहे। पैनल में डॉ. एसी अग्रवाल, डॉ. अभिनव सेंगर रहे। आईएमए अध्यक्ष डॉ नंदिनी रस्तोगी एवं सचिव डॉ विकास मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया।