कानपुर। तापमान बढ़ने से सरसों की फसल अधिक प्रभावित होगी। मौसम गर्म रहने से फसल जल्दी पकेगी। बीज भी छोटा हो जाएगा। इससे तेल कम निकलेगा। साथ ही फसल की पैदावार प्रभावित होगी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के निदेशक शोध डॉ. महक सिंह ने यह बात बताई। उन्होंने कहा कि स्थिति के मद्देनजर किसान दिन में हल्की सिंचाई करें। रात में सिंचाई करने पर तेज हवा से पौधे गिर सकते हैं।
डॉ. सिंह ने बताया कि इस समय दिन का पारा 27 से 32 डिग्री के बीच झूल रहा है। यह स्थिति देर से बोई गई फसलों के लिए प्रतिकूल है। जो फसलें खेत में खड़ी हैं और देर से बोई गई हैं, वे इस प्रभाव क्षेत्र में आ जाएंगी। तापमान बढ़ने से लाही में कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि जो गेहूं देर से बोया गया, वह भी प्रभावित होगा। इसके अलावा चना, मटर, मसूर की फसल और ग्रीष्मकालीन मूंगफली पर असर आएगा।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि जैसे ही फसलें कटे और खेत खाली हों तो जायद की फसल की बोआई कर दें। आलू की खोदने के बाद मूंग और उड़द की फसल बो सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को इस संबंध में सलाह दी जा रही है।