झींझक में खराब मौसम के बाद हुई बारिश के कारण कसबे के सरकारी धान खरीद
केंद्र में आसमान के नीचे खुले में रखा किसानों का लगभग 500 कुंतल धान भीग
गया। इससे किसानों को भारी नुकसान होने की संभावना है। ऐसे में किसानों का
गेहूं अब आढ़ती को बेचना भी मुश्किल होगा।
सरकारी धान खरीद केंद्र
वर्तमान में झींझक मंडी समिति में संचालित है। इस पर लगभग 500 जमा किसानों
का धान बारिश के चलते भीग गया। राम कुमार, श्याम कुमार, राधे श्याम,
घनश्याम, राम शंकर, विनोद, जगजीत, रामकिशोर आदि किसानों ने बताया कि बारिश
से धान भीग जाने से वह सड़क पर आ गए हैं।
इसे उठाकर अपने घर ले जा रहे हैं।
बताया कि भीगे हुए धान को अब न तो सरकारी खरीद केंद्र ही खरीदेगा और बाजार
में आढ़ती भी धान भीग जाने से कौड़ियों के भाव खरीदेंगे।
इधर, गल्ला
व्यापारी हृदेश कुमार, शिवकुमार, रमेश गुप्ता ने बताया कि भीगा हुआ धान
नहीं खरीदना उनकी मजबूरी है। मिल में कुटाई करने के लिए धान का चावल टूट
जाता है।
व्यापारियों को नुकसान होने के चलते भीगे धान को नहीं खरीदते हैं।
किसान नेता चौधरी जगजीवन सिंह यादव ने बताया कि सरकार की असफलता के चलते
किसान मजबूरी में आढ़तियों के हाथ 1050 रुपये में धान बेचने को मजबूर है।
बारिश से किसानों को भारी नुकसान होगा।
इस संबंध में झींझक एसएमआई व धान
खरीद केंद्र के प्रभारी मनोज वर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी बीमार हैं। वह
इलाज दिल्ली में करा रहे हैं। मालूम हो कि एक पखवारे से धान खरीद ठप पड़ी
थी। खरीद न होने पर हुए नुकसान को लेकर किसानों में आक्रोश है।