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Kanpur News: मंदिर-मकबरा विवाद में पुनर्स्थापन के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका खारिज

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फोटो-25-आबूनगर रेड्डया स्थित विवादित स्थल। स्रोत: फाइल फोटो
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फतेहपुर। चर्चित मंदिर-मकबरा विवाद में पुनर्स्थापन (रेस्टोरेशन) प्रार्थना पत्र स्वीकार किए जाने के खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण (रिवीजन) याचिका पर बृहस्पतिवार को एडीजे प्रथम कोर्ट में अंतिम सुनवाई हुई। अदालत ने पुनरीक्षण याचिका की अर्जी खारिज कर दी है। अब दोनों पक्षों के बीच मूल मुकदमे की सुनवाई दोबारा आगे बढ़ेगी। सुनवाई के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात रही। अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के आबूनगर रेड्डया मोहल्ले स्थित धार्मिक स्थल को लेकर हिंदू संगठनों ने इसे ठाकुरद्वारा होने का दावा किया था। ठाकुरद्वारा की साफ-सफाई के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी। 11 अगस्त 2025 को हिंदू संगठनों की भीड़ पहुंची थी। यहां दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद मामला 30 अगस्त 2025 को अदालत पहुंचा।
धार्मिक स्थल की भूमि का विवाद पहले सिविल जज की अदालत में खारिज हो चुका था। खारिज वाद के पक्षकार विजय सिंह ने दोबारा सुनवाई के लिए रेस्टोरेशन याचिका दाखिल की थी। इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने इसके खिलाफ जिला जज की अदालत में आपत्ति दाखिल की थी। जिला जज की अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए एडीजे प्रथम की अदालत में स्थानांतरित किया था।
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दोनों पक्षों की ओर से करीब 10 माह तक रिवीजन याचिका पर बहस चली। विजय सिंह के अधिवक्ता रामजी सहांय ने बताया कि रेस्टोरेशन स्वीकार किए जाने के खिलाफ दूसरे पक्ष की ओर से दाखिल रिवीजन याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।


एक नजर में पूरा मामला
- 2010 में रामनरेश की भूमिधरी खारिज कर मकबरा मंगी के नाम दर्ज करने का एसडीएम कोर्ट से आदेश हुआ।
- 2012 में खतौनी से रामनरेश सिंह का नाम हटाकर मंगी मकबरा का नाम दर्ज हुआ।
- 2014 में रेस्टोरेशन सिविल जज सीनियर डिवीजन के यहां दाखिल हुआ। यहां से खारिज होने के बाद एडीजे कोर्ट में स्वीकार हुआ। इसके बाद मुकदमे में विशेष पैरवी नहीं हुई और मुतवल्ली के तौर पर मो. अनीश काबिज रहे।
- 11 अगस्त 2025 को पूजा-अर्चना और मजारों को नुकसान पहुंचाने की घटना के बाद मंदिर-मकबरा विवाद फिर सुर्खियों में आया।
- 30 अगस्त 2025 से कोर्ट में सुनवाई दोबारा शुरू हुई।
- 10 सितंबर 2025 को विवादित स्थल पर अस्थायी पुलिस चौकी बनाई गई।
- सितंबर 2025 में पांच हजार रुपये जुर्माने के साथ टाइम वार्ड मामले पर फैसला आया।
- 31 अक्तूबर 2025 को कोर्ट ने रेस्टोरेशन के मूल मुकदमे में सुनवाई का निर्णय लिया।
- अक्तूबर 2025 में अपील की सुनवाई के दौरान मकबरा के मृतक मुतवल्ली अनीश की जगह उनके बेटे अबु हुरेरा को पक्षकार बनाया गया।
- नवंबर 2025 में कोर्ट ने ठाकुरद्वारा पक्ष की ओर से मूल मुकदमे में पक्षकार बनाने के लिए दाखिल पुनर्स्थापन पत्र स्वीकार किया।
- दिसंबर 2025 में मकबरा पक्ष ने मूल मुकदमे की सुनवाई का विरोध करते हुए पुनर्स्थापन पत्र अस्वीकार करने की मांग को लेकर डीजे कोर्ट में अपील की।


11 अगस्त 2025 को हुआ था विवाद
आबूनगर मोहल्ले के रेड्डया स्थित स्थल को लेकर सात अगस्त 2025 को मठ-मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति ने पूर्व डीएम रविंद्र सिंह को ज्ञापन देकर इसे मंदिर बताते हुए सफाई और पूजा-पाठ की अनुमति मांगी थी। प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिलने के बाद 11 अगस्त को हिंदू संगठनों की भीड़ ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर पूजा-पाठ किया और मजारों में तोड़फोड़ की। इस दौरान शंखध्वनि कर भगवा ध्वज लहराया गया। दोनों पक्षों के बीच ईंट-पत्थर भी चले थे। प्रशासन ने रातोंरात धार्मिक स्थल की मरम्मत कराई थी। पुलिस ने मामले में 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

फोटो-25-आबूनगर रेड्डया स्थित विवादित स्थल। स्रोत: फाइल फोटो

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