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मिलिए बड़े-बड़े 'बंगले वाले गरीब' लोगों से

Mon, 28 May 2018 12:45 PM IST
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
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योजना के फार्म भरते लोग
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आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेने वालों की सूची में वे लोग भी हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं। इसका खुलासा रविवार को केंद्र से आई लाभार्थियों की सूची के सत्यापन के दौरान हुआ। इसमें सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों और करोड़पतियों के नाम भी शामिल हैं, जिनके पास बड़े-बड़े बंगले और महंगी गाड़ियां हैं लेकिन उन लोगों के नाम गायब हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वास्तव में इस योजना के पात्र हैं।
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देश में आर्थिक रूप से कमजोर 10 करोड़ लोगों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की है। इस योजना में कानपुर नगर के 4.08 लाख परिवार शामिल हैं। इनमें से तीन लाख परिवार शहरी और 1.08 लाख परिवार ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। योजना में लाभार्थी परिवार एक साल में पांच लाख रुपये तक का इलाज नि:शुल्क करा सकेंगे। इलाज योजना से संबद्ध होेने वाले सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलना है। केंद्र सरकार के आदेश पर रविवार को यहां यह योजना लांच की गई। पहले दिन सभी वार्डों में कैंप लगाए गए। कानपुर में बानगी स्वरूप वार्ड-25 (नवीन नगर, काकादेव) और वार्ड - 92 (किदवई नगर दक्षिणी) वार्ड में पड़ताल के दौरान लाभार्थियों की सूची में अपात्रों के नाम शामिल होने का पता चला। कानपुर गोविंद नगर स्थित हाइडिल कालोनी में रहने वाले लगभग 80 सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के नाम भी लाभार्थियों की सूची में शामिल हैं। इसी तरह अन्य वार्डों में लाभार्थियों की सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का पता चला है।

जिम्मेदारों ने दिए ये बयान

डेमो पिक
सीएमओ ने वार्ड के लाभार्थियों की आधी-अधूरी लिस्ट भेजी है। जो लिस्ट मिली, उसमें सांसद भोले के भाई सहित तमाम ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जो करोड़पति हैं। तमाम पात्रों के नाम सूची से गायब हैं। सीएमओ को सूचना दे दी है।---कविता सिंह, पार्षद, वार्ड-25, नवीन नगर काकादेव

मेरे वार्ड में लाभार्थियों की सूची में तमाम ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जो बंगलों और लग्जरी कारों के मालिक हैं। ऐसे भी तमाम लोग हैं, जिनके नाम दर्ज हैं, पर वे उन मकानों में नहीं रहते। सीएमओ को सूचना दे दी है।--प्रमोद जायसवाल, पार्षद, किदवई नगर दक्षिणी

आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का पता चला है। अभी तक शासन ने अपात्रों के नाम काटने का आदेश नहीं दिया है। सिर्फ सत्यापन करने के निर्देश हैं। शासन को गड़बड़ियों की सूचना भेजी जाएगी। आग्रह किया जाएगा कि सत्यापन का समय बढ़ाया जाए और पात्रों के नाम जुड़ सकें।--डा. अशोक शुक्ला, मुख्य चिकित्साधिकारी

लिस्ट पिछली सरकार ने अपने हिसाब से बनाई थी। इसमें तमाम गड़बड़ियों का पता चला है। संबंधित विभाग के अधिकारी, प्रधान या पार्षद, तहसीलदार क्षेत्र में जाएंगे। सूची एनाउंस की जाएगी। इसमें जो भी अपात्र होंगे, उनके नाम काटे जाएंगे।  --देवेंद्र सिंह भोले, सांसद, भाजपा
 
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ये है स्थिति

डेमो पिक
वार्ड-25 नवीन नगर, काकादेव
लाभार्थी परिवारों की संख्या - 1346
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उपलब्ध कराई गई लाभार्थियों की लिस्ट - 191
इसमें भी सीरियल नंबरों से गायब नाम - 22
अपात्र परिवार - 50 से अधिक
सूची में शामिल वार्ड-25 संपन्न लोग


सूची में सीरियल नंबर    नाम                                                            आर्थिक स्थिति
    59                         गजेंद्र सिंह(भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले के भाई)    संपन्न
    27                        विनोद कुमार, आबकारी                                                संपन्न
     39                        वीरेंद्र गंगवार                          एम-ब्लाक, काकादेव में 500 वर्गमीटर का बंगला
    54                        राजहंस हरगोविंद सिंह                फार्च्यूनर गाड़ी, करोड़ों का टर्नओवर                
    66                        वीरपाल सिंह चौहान                    बिल्डर, फार्च्यूनर गाड़ी
    70                        रामजी लाल यादव    पूर्व प्रत्याशी विधानसभा चुनाव, पूूर्व जिला पंचायत सदस्य 
    80                        जितेंद्र भसीन                            एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट


वार्ड - 92 
        268                पंकज तिवारी                         आवासीय कम व्यवसायिक बंगला                    
        278                अल्का गौतम                            बड़ा बंगला 
        279                दिवंगत विजय कुमार गौतम        बड़ा बंगला
                 
लगभग 20 प्रतिशत लाभार्थियों के पते बदले
केंद्र सरकार ने लाभार्थियों की जो सूची भेजी है, वह सन् 2011 की जनगणना का आधार बताकर बनाई गई है। तब से अब तक लगभग 20 प्रतिशत लोगों के पते बदल गए हैं। इनमें से तमाम का तो अता - पता ही नहीं है। ऐसे में उन्हें योजना का लाभ कैसे मिल पाएगा, इस पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। वार्डों में भेजी गई लाभार्थियों की सूचियों में हजारों सीरियल नंबरों के आगे पात्रों के नाम, पते ही नहीं लिखे हैं। 
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