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यहां रिटायर्ड जज करेंगे गंगा में गिरते नालों की निगरानी, एनजीटी ने दिया आदेश, बनेगी मॉनीटरिंग कमेटी

Thu, 23 Aug 2018 05:34 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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गंगा प्रदूषण
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यूपी के कानपुर शहर और अन्य स्थानों पर गंगा में गिरने वाले नालों को रोकने और उनको मोड़ने की निगरानी के लिए एक मॉनीटरिंग कमेटी बनेगी जो एक सेवानिवृत्त जज की देखरेख में काम करेगी। मंगलवार को हुई नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की सुनवाई में यह आदेश जारी किया गया है।
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सुनवाई में यह भी कहा गया कि जाजमऊ में बनने वाले दो करोड़ लीटर क्षमता वाले ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण जल्द शुरू कराया जाए। इसके लिए केंद्र से 400 करोड़ से अधिक के बजट पर स्वीकृति मिल चुकी है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए चल रही परियोजनाओं में तेजी लाने और 15 दिसंबर से पहले सभी नालों को गंगा में गिरने से रोकने के लिए पिछले दिनों केंद्र और प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी। इस पर अमल करने के लिए इस कार्य में लगी एजेंसियों को कड़े दिशा निर्देश भी दिए गए हैं।

अब एनजीटी ने भी गंगा को निर्धारित समय में प्रदूषण मुक्त करने के  आदेश जारी किए हैं। इसमें मॉनीटरिंग कमेटी गठित कर काम करने वाले एजेंसियों पर नजर रखने को कहा गया है। दिल्ली में हुई इस सुनवाई में जल निगम, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी बुलाया गया था। 
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मात्र 5 प्रतिशत नाले टैप करने का काम चल रहा

गंगा प्रदूषण
13 जुलाई 2017 को एनजीटी ने 700 पेज के अपने आदेश में कहा था कि गंगा में जितने नाले गिरते हैं, उन सभी को टैप किया जाए, हर जगह ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर नालों के हानिकारक पानी को शोधित कर उसे सिंचाई के काम में लाया जाए, गंगा में प्रदूषण की मात्रा कम करने के लिए समय-समय पर जल का परीक्षण किया जाए।

इन सभी कार्यों के लिए करीब 13 हजार करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था, प्रदूषण की जांच के लिए कमेटियों का गठन भी किया गया, नालों के टैप करने की योजना भी बनी जिसमें मात्र 5 प्रतिशत नाले टैप करने का काम इस आदेश के करीब आठ महीने बाद शुरू हो पाया।

इसी वजह से एनजीटी ने करीब एक साल पहले मॉनीटरिंग के लिए निगरानी कमेटी बनाई थी। निगरानी कमेटी ने भी कई आदेश दिए पर उनका भी अनुपालन नहीं हुआ। अब रिटायर्ड जज की निगरानी में नई मॉनीटरिंग कमेटी बनाने को कहा गया है।
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27 जुलाई की बैठक के निर्देश भी बेअसर

गंगा प्रदूषण
एनजीटी की 27 जुलाई को हुई बैठक में जल निगम, जल संस्थान, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नमामि गंगे परियोजना से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि शहरी क्षेत्रों में गंगा किनारे बोर्ड लगाए जाएं और उनपर लिखा जाए कि गंगा जल आचमन योग्य, नहाने योग्य है या नहीं। ये बोर्ड आज तक नहीं लगाए गए।


- वर्तमान में कानपुर में गंगा में गिरने वाले कुल नाले- 30
- इनसे रोजाना गिरने वाला कुल कचरायुक्त पानी- 43 करोड़ लीटर
- सीसामऊ नाला आधा टैप किया गया आधा काम बाकी
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