प्रशासन ने दो अक्टूबर तक जिले के गांवों को खुले में शौचमुक्त कराने का संकल्प लिया है। अपने इस संकल्प को पूरा करने के लिए सोमवार को प्रधानों को जागरूक करने के उद्देश्य से अर्चना टाकीज में टॉयलेट एक प्रेम कथा फिल्म को दिखाई गई। फिल्म देखकर निकले प्रधानों का कहना था कि एक महिला की इच्छा शक्ति समाज की सोच बदल देती है तो हम क्यों नहीं कुप्रथाओं को बदल नहीं सकते हैं। गांव के हर व्यक्ति को शौचालय बनवाने और उसका प्रयोग करने के लिए प्रेरित करेंगे।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने व उनका उपयोग के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसी के तहत मंगलवार को शहर की अर्चना टॉकीज में जिले भर के प्रधानों को टायलेट एक प्रेमकथा फिल्म दिखाई गई। प्रधानों के साथ डीएमनरेन्द्र श्ंाकर भी मौजूद रहे। प्रधानों को शौचालय के लिए लोगों को जागरूक करने की शपथ दिलाई। डीएम ने प्रधानों को शौचालय की उपयोगिता बताई।
डीएम ने कहा कि फिल्म के किरदार हमें हमारे समाज का आइना दिखाते हैं। एक महिला सम्मान के लिए घर में शौचालय बनवाना चाहती है, लेकिन उसे परेशानियों का सामना करना पड़ता है। डीएम ने कहा कि यहां से आए प्रधान संकल्प लें कि अपने गांव को खुले में शौच मुक्त बनाएंगे तो समझो प्रयास सफल रहा। सीडीओ एसपी सिंह ने कहा कि हर हाल में दो अक्टृबर तक जिले को पूर्णता खुले में शौच मुक्त बनाना है। इसके लिए प्रधान व ग्रामीणों के सहयोग की आवश्यकता है।
सहेली बनकर महिलाओं को करेगी जागरूक
फिल्म देखने आई वीर पुरा की प्रधान गीता देवी का कहना है कि शौचालय न होने की वजह से सबसे ज्याद परेशानी महिलाओं को होती है, लेकिन कुरीतियों के चलते वह फिर ही इसका विरोध नहीं कर पाती। फिल्म देखने के बाद उन्होंने तय किया है कि वह प्रधान के पद से हट कर एक सहेली के रूप में महिलाओं से बात कर शौचालय के लिए जागरूक करेगें। और अपने गांव को खुले में शौच मुक्त बनाएगी।
फिल्म से बड़ा आत्मविश्वास, मिली प्रेरणा
ऐरी रामपुरा की ग्राम प्रधान रानीपाल का कहना है कि गांव में जब लोगों को शौचालय के लिए बार बार जागरूक किया जाता है और लोग फिर भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे है तो इससे एक निराशा सी आई थी, लेकिन फिल्म देखने के बाद वह खुदा को आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस कर रही है और फिल्म से एक नई प्रेरणा मिली है कि इस समस्याएं की वजह से महिलाओं को कितनी परेशानी उठानी पड़ती है। अब वह पूरे जोश के साथ गांव के लोगों को शौचालय के लिए जागरूक करेंगी।
- ग्रामीणों को भी दिखाई जाए फिल्म तब बनेगी बात
अनघौरा के प्रधान सर्वेश सिंह का कहना है कि फिल्म से काफी प्रेरणा मिली है लेकिन यह प्रधानों के साथ साथ अन्य ग्रामीणों को भी दिखाई जाए तो तब बात बनेगी। ग्रामीणों में जागरूकता की कमी की वजह से लोग समझाने के बाद भी शौचालय बनवाने के लिए तैयार नहीं होते। इसके लिए प्रशासन को गांवों में डिजिटल वैन भेजकर यह फिल्म ग्रामीणों को भी दिखानी चाहिए, जिससे की गांव के लोग भी शौचालय के लिए जागरूक हो सके और जिले क ो पूर्णता खुले में शौच मुक्त बनाया जा सके।
- भ्रष्टाचार व बालू का न मिलना एक बड़ी समस्यां
हिम्मतपुर के प्रधान केपी सिंह का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे अभियानों की वजह से अब लोग शौचालय के लिए जागरूक भी हो रहे हैं लेकिन निचले स्तर पर फैले भ्रष्टाचार व बालू न मिलने की वजह से गांवों को पूर्णता खुले में शौच मुक्त बनाने के संकल्प में काफी दिक्कते आ रही है। हालांकि जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए है कि शौचालय के लिए बालू ले जाने के लिए ग्रामीणों को न रोका जाए, लेकिन कुछ थानेदार फिर भी ग्रामीणों को परेशान करते है। फिल्म देखने के बाद एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। शौचालय के लिए जारी इस लड़ाई को और तेज करेंगे।
फिल्म देखकर लिया घर-घर शौचालय बनवाने का संकल्प
जिले भर के प्रधानों को प्रशासन ने दिखाई फिल्म टॉयलेट एक प्रेमकथा