जालौन रोड स्थित एक निजी उत्सव गृह में सोमवार को बेटी बचाओ विषय पर कार्यशाला हुई। इसमें मुख्य अतिथि जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने कहा कि समाज में बेटी और बेटों के बीच भेदभाव के कारण लिंगानुपात में कमी आई है।
जिलाधिकारी ने कहा कि बेटियों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण कन्या भ्रूण हत्या की समस्या ने जन्म लिया है। एसीएमओ डा. सत्य प्रकाश ने बताया कि जिले में वर्ष 2001 में प्रति हजार पुरुषों पर 391 महिलाएं थी। वर्ष 2011 में यह अंाकडा गिरकर 914 पर आ गया। वर्तमान में यह अनुपात गिरकर 865 पर आ गया है।
उन्होंने कहा कि लिंगानुपात कम होने से महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में बढ़ोत्तरी होगी। इस दौरान प्रोजेक्टर पर समाज में बेटियों का महत्व नामक लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्य चिकित्साधिकारी अल्पना बरतारिया ने कहा कि जिले में 6 वर्ष तक के बच्चों में यह अनुपात 881 बेटियां प्रति एक हजार लड़कों में है।
कन्या भ्रूण हत्या रोकना हम सभी का दायित्व है। कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अपराध और गंभीर समस्या है। इस दौरान सीडीओ एसपी सिंह, अपर शोघ अधिकारी दिनेश कोष्ठा, अकील, डा. रमेश चंद्रा, डा. रेनू चंद्रा, गांधी महाविद्यालय प्रधानाचार्या डा. अलका नायक, सीएमएस जीके निगम, एसीएमओ आशाराम और रामशरण जाटव मौजूद रहे रहे।
-बेटी बचाओ कार्यक्रम मे फिल्म देखते जिलाधिकारी ।
-उपस्थित डाक्टर ।
-कन्या भ्रूण हत्या को हर हाल में रोकना होगा- डीएम
-जिले में लगातार गिर रहा है लिंगानुपात
-प्रोजेक्टर पर बेटियों का महत्व फिल्म भी दिखाई गई