गरीब सवर्णों को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) में पूरे दस प्रतिशत आरक्षण पाने के लिए एक वर्ष और इंतजार करना पड़ेगा। इंस्टीट्यूट प्रशासन ने इस बार केवल चार प्रतिशत ही आरक्षण लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत इंस्टीट्यूट में बीटेक, एमटेक, एमएस और पीएचडी की दस प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएंगी।
मंगलवार को यह फैसला बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) की बैठक में लिया गया। तय हुआ कि गरीब सवर्णों का दस प्रतिशत आरक्षण दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में चार प्रतिशत और दूसरे चरण में शेष छह प्रतिशत आरक्षण को लागू किया जाएगा।
इंस्टीट्यूट प्रशासन के मुताबिक सभी कोर्सों में मिलाकर करीब 300 सीटें बढ़ने की उम्मीद है। पूरे दस प्रतिशत आरक्षण लागू होने पर सीटों में 25 प्रतिशत का इजाफा होगा।
दरअसल मानव संसाधन विकास मंत्रालय के गरीब सवर्णों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण को लागू करने के आदेश के बाद से संस्थान प्रशासन परेशान था। संस्थान ने मंत्रालय के समक्ष अतिरिक्त छात्रों के लिए संसाधन और सुविधाओं के न होने की बात कही थी। साथ ही इस आरक्षण को दो चरण में लागू करने की अनुमति मांगी थी। मंत्रालय ने संस्थान को अनुमति दे दी थी।
छात्राओं के लिए सुपर न्यूमरेरी कोटा 17 प्रतिशत हुआ
देश भर के सभी आईआईटी में छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए शुरू किए गए सुपर न्यूमरेरी कोटा को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया गया है। आईआईटी कानपुर में भी इसे इस साल लागू कर दिया गया है। इसके तहत हर विभाग में ओवरऑल 17 फीसदी छात्राओं की संख्या होनी है। मसलन एयरोस्पेस विभाग में छात्राओं की संख्या 15 प्रतिशत है तो दो प्रतिशत और छात्राओं की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी।
चार डीन और पांच एसोसिएट डीन बनाए गए
बीओजी ने चार डीन और पांच एसोसिएट डीन की नियुक्ति पर भी मुहर लगा दी है। डीन रिसोर्स एंड एलुमिनाई प्रो. बीवी फणी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में उनकी जगह प्रो. विजय कुमार जैन को नया डीन बनाया गया है।