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मीडियावालों की बातों से झल्लाये कैबिनेट मंत्री ने खुद उखाड़ फेंकी लाल बत्ती

Fri, 21 Apr 2017 06:16 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी
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योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी इन दिनों सबसे सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। एक दिन पहले मंत्री पचौरी द्वारा भरी महफिल में दिव्यांग सफाई कर्मचारी को अपमानित करने का मामला सामने आया था और अब कानपुर में मीडिया के सवालों से उखड़े पचौरी ने खुद अपनी गाड़ी से लाल बत्ती उखाड़ फेंकी। 
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कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी
मंत्री सत्यदेव पचौरी कानपुर शहर के रहने वाले हैं और दो बार से गोविंद नगर विधानसभा सीट से विधायक हैं। गुरवार को पचौरी कानपुर विश्वविद्यालय में आयोजित एजुफेस्ट-2017 कार्यक्रम में पहुंचे थे। मंत्री के काफिले में शामिल लालबत्ती लगी गाड़ी देख मीडियावालों ने उनसे बत्ती न हटाने का कारण पूछा तो पचौरी उखड़ गए और खुद अपनी गाड़ी की लाल बत्ती हटाने के लिए कार के पास पहुंच गए।

कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी
मीडिया के कैमरों के सामने ही उन्होंने लाल बत्ती हटा दी और कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल बत्ती कल्चर को खत्म कर बहुत अच्छा काम किया है। ऐसा पहले कभी किसी सरकार ने नहीं किया। भाजपा की नजर में देश की जनता ही वीआईपी है। 
 

कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी
बताते चलें कि बुधवार को मंत्री सत्यदेव पचौरी ने भरी महफिल में दिव्यांग सफाई कर्मचारी को अपमानित किया था। मंत्री एक वीडियो में सफाई कर्मचारी की तरफ इशारा करते हुए कह रहे हैं कि इस ‘लूले लंगड़ों’ को संविदा पर रख रखा है।वीडियो में सत्यदेव पचौरी दिव्यांग सफाई कर्मचारी को यह भी कहते हैं कि ऐसा आदमी क्या सफाई कर पाएगा। सफाई कर्मचारी से जब उसकी तनख्वाह पूछी जाती है तो वो अपनी तनख्वाह चार हजार रुपये बताता है।
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कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी
एक न्यूज चैनल से बातचीत में दिनेश ने कहा, ‘मंत्री जी को हमने बताया था कि हम यहां साल 1999 से काम कर रहे हैं और मुझे चार हजार रुपए तनख्वाह मिलती है। इसके बाद मंत्री जी ने कहा कि ऐसे टेड़े मेड़े लोगों को रखोगे तो क्या सफाई होगी।’ उन्होंने कहा कि मंत्री जी के इस बयान से वह बहुत चिंतित हैं। इतने साल हो गए, आजतक मैंने किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया है। इससे पहले भी तीन-चार मंत्री बदले जा चुके हैं लेकिन कभी किसी ने उनके काम पर सवाल नहीं उठाया। उधर,  दिव्यांग कर्मचारी के अपमान पर मंत्री सत्यदेव पचौरी ने सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा कि मेरा मतलब दिव्यांग को हटाना नहीं था बल्कि मेरा कहना था कि वह कमजोर है, काम नहीं कर पाता तो उसकी सहायता को एक दूसरा व्यक्ति रख लो।
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