अपने परिवार के साथ सत्यप्रकाश सिंह। फाइल फोटो।
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कानपुर। महाराष्ट्र के वर्धा जिले के पूलगांव स्थित सेना के सबसे बड़े हथियार भंडार में लगी आग से श्याम नगर के सत्य प्रकाश सिंह (51 साल) शहीद हो गए। वह मूल रूप से हरदोई के रहने वाले थे लेकिन लंबे समय से कानपुर में रह रहे थे। पूरा परिवार श्याम नगर में रहता है। शहीद जवान का पार्थिव शरीर गुरुवार को लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट (12 बजे) ले आया जाएगा। लखनऊ से आर्मी की गाड़ी पार्थिव शरीर लेकर कानपुर (1:30 बजे) आएगी। शहर मेें ही दाह संस्कार किया जाएगा। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के कई लोग नागपुर रवाना हो गए, जहां से पार्थिव शरीर लाया जाएगा।
श्यामनगर के डी ब्लॉक में रहने वाले सत्यप्रकाश सिंह (51) आर्मी की डिफेंस सिक्योरिटी कोर (डीएससी) में कांस्टेबल थे। मूल रूप से हरदोई के हरपालपुर के रहने वाले सत्यप्रकाश की भर्ती 1985 में हुई थी, तभी से देश सेवा में लगे थे। 2006 में रिटायर हुए और आयुध डिपो में नौकरी करने लगे। महाराष्ट्र के आयुध डिपो में लगी आग को बुझाने के चक्कर में वह शहीद हो गए। इसकी सूचना परिजनों को मिल गई लेकिन पत्नी गीता को मौत की खबर नहीं दी गई। शहीद जवान के भतीजे नीरज सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले गीता सिंह का एक्सीडेंट हो गया था। उनके सिर में गंभीर चोट आई और इलाज चल रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद सिर के चोट के उभरने की आशंका है, इसलिए सत्यप्रकाश के गंभीर बीमारी की सूचना दी गई है। इससे वह बेसुध हैं। बार-बार पति की खैरियत पूछ रही हैं। घर आने-जाने वालों को लेकर भी सशंकित हैं। कह रही हैं कि कुछ अनहोनी तो नहीं हुई है। इस कारण किसी को घर के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। घर के बाहर भी सन्नाटा पसरा है। सत्यप्रकाश के शहीद होने की जानकारी बेटे ऋषभ और बेटी दीक्षा को है लेकिन वह मां के सामने नहीं जा रहे। सबका रो-रोकर बुरा हाल है। सत्यप्रकाश के घर के आसपास सन्नाटा पसरा है। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला। सभी शहीद सत्य प्रकाश के स्वभाव को सराह रहे हैं।