कानपुर कैंट स्थित डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) कांप्लेक्स के सामान्य वस्तु नियंत्रणालय में 2016 में फर्जीवाड़ा कर भर्ती हुए छह क्लर्कों की दोबारा बर्खास्तगी हो सकती है। सीबीआई की ओर से सभी क्लर्कों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद इन पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
दरअसल महानिदेशक की जांच में फर्जीवाड़े के साक्ष्य मिलने के बाद सभी छह क्लर्कों को बर्खास्त कर दिया गया था लेकिन ऑफिसर्स बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संतोष तिवारी पर कार्रवाई नहीं हुई थी। वहीं सभी क्लर्क सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) स्टे ले आए थे और नौकरी कर रहे हैं। डीजीक्यूए के निर्देशों के तहत विभाग के तत्कालीन नियंत्रक देवकीनंदन ने छह क्लर्कों की नियुक्ति के लिए आदेश जारी कर वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संतोष तिवारी को भर्ती बोर्ड का चेयरमैन बनाया था।
परीक्षा में सफल होने के बाद भी नियुक्ति न होने की शिकायत अभ्यर्थियों ने तत्कालीन रक्षा मंत्री, डीजीक्यूए के अफसरों से की थी। आरोप थे कि चेयरमैन ने विभाग के ही आफिस अधीक्षक एवं डीजीक्यूए सलाहकार समिति के सदस्य एचएन तिवारी से मिलकर लाखों रुपये लेकर रिश्तेदारों को कम नंबर होने के बाद भी भर्ती कर लिया है।
तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर परिकर ने जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद तत्कालीन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह ने जांच कराई थी। इसमें भी आरोप सही पाए गए थे। सीबीआई ने भी आरोप सही पाए जाने पर चेयरमैन के अलावा छह क्लर्कों के खिलाफ साजिश रचना, धोखाधड़ी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई है।