यूपी के बांदा जिले में जेल में निरुद्ध उम्रकैदी की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेश पर मृतक के आश्रितों के लिए तीन लाख रुपये की धनराशि दो दिन पूर्व प्रदेश सरकार ने मंजूर कर डीएम को तीन के अंदर भुगतान करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने इसी अगस्त माह में मुआवजा देने का आदेश दिया था। यह पैसा आरोपी चार जेल कर्मियों से वसूला जाएगा।
बदौसा थाना के कस्बा निवासी शरीफ उर्फ बग्गड़ पुत्र शफी अहमद को अपर एडीजे प्रथम की अदालत से मार्च 2013 में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तब से वह बांदा जेल में बंद था। 6 अप्रैल 2015 को जेल में उसकी तबीयत बिगड़ गई। जिला अस्पताल से उसको कानपुर के लिए रेफर कर दिया गया। 7 अप्रैल को कानपुर मेडिकल कालेज में उसकी मौत हो गई। शरीफ के परिजनों ने एक डिप्टी जेलर और तीन बंदी रक्षकों पर मारपीट का आरोप लगाया था। इसकी मजिस्ट्रेटी जांच अभी चल रही है। शरीफ के परिजनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली से शिकायत कर न्याय की फरियाद की थी।
आयोग ने जांच पड़ताल के बाद कैदी की मौत के लिए चारों जेल कर्मियों को दोषी मानते हुए शरीफ के आश्रितों को मुआवजा देने के आदेश दिए थे। आयोग ने यह भी कहा कि यह राशि दोषी जेल कर्मियों से वसूली जाए। आयोग के आदेश के बाद राज्य सरकार ने मुआवजा राशि की वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। अपर कारागार महानिदेशक (प्रशासन एवं सुधार) चंद्रप्रकाश ने बांदा डीएम और कारागार अधीक्षक को पत्र भेजकर कहा कि मुआवजा राशि तीन दिन के अंदर कैदी के आश्रितों को मुहैया करा दी जाए।