क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर दुख, दर्द, खुशी आदि माहौल में आपका व्यवहार कैसे परिवर्तित हो जाता है। शायद आपने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया होगा लेकिन अब इसे ‘गेम थ्योरी’ के जरिए पता किया जा रहा है। इस पर दुनिया भर में रिसर्च हो रहा है।
ये बातें गुरुवार को आईआईटी कानपुर में साउथ कोरिया के अल्सान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रो. चिओल मिन ने बताईं। वे यहां छठी चाइना इंडिया जापान कोरिया मैथमेटिकल बायोलॉजी कोलोक्यूअम कम कांफ्रेंस के दूसरे दिन गुरुवार को संबोधित कर रहे थे। प्रो. चिओल ने बताया कि इंसान के दिमाग में न्यूरांस होते हैं जो शरीर के हर हिस्से से सूचनाएं एकत्र करते हैं। अब इन न्यूरांस के काम पर अध्ययन कर उसे गेम थ्योरी से जोड़ा जा रहा है।
गेम थ्योरी का मतलब अंकों से मालूम होगा कि किस इंसान के व्यवहार में किस तरह का बदलाव हुआ है। इसके अलावा जापान के प्रो. यशुहिरो टेक्युची, प्रो. बुजुर्के, प्रो. करमेशु के, प्रो. केई टोकिटा, डॉ. श्वेता सहित दो दर्जन से अधिक रिसर्च स्कॉलर व गणित के शिक्षकों ने अलग-अलग विषयों पर रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। तकनीकी सत्र में जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर के प्रो. वीपी सक्सेना ने प्लीनेरी टॉक दी। उन्होंने इस दौरान अलग-अलग बीमारियों के लिए दी जाने वाली दवाओं की मात्रा का अध्ययन करने का तरीका बताया। कहा कि मैथमेटिकल मॉडल के जरिए पता लगाया जा सकता है कि किस मर्ज में कितनी दवाओं की जरूरत है और कबतक दवाएं दी जाएं। तकनीकी सत्र में एक छात्रा ने बारिश होने के कारण को गणितीय अध्ययन के जरिए समझाया। बताया कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में यह मान्यताएं होती हैं कि अगर हवन किया जाएगा तो बारिश हो जाएगी। दरअसल हवन करने और बारिश में धार्मिक मान्यता की जगह वैज्ञानिक तर्क ज्यादा है। जब लोग हवन करते हैं तो वाष्प बनकर ऊपर जाती है और जब ज्यादा वाष्प एकत्रित हो जाती है तो वह बारिश के रूप में नीचे आती है।