इसे आस्था ही कहेंगे जब पूरा देश रावण दहन कर खुशियां मनाता है ताे कुछ लाेग एेसे भी हैं जाे रावण के सौ साल पुराने मंदिर में विशेष अराधना करते हैं। यह पूजा केवल दशहरे के दिन ही हाेती है। कानपुर के शिवाला में स्थित देश के एकलौते दशानन मंदिर में शुक्रवार सुबह से भक्त रावण की पूजा अर्चना करने के लिए उमड़ रहे हैं।
विज्ञापन
2 of 11
रावण का मंदिर
यह मंदिर साल में एक बार विजयादशमी के दिन ही खुलता है और लोग सुबह-सुबह यहां रावण की पूजा करते हैं। दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा होती है और श्रद्धालु तेल के दिए जलाकर मन्नतें मांगते हैं।
विज्ञापन
3 of 11
रावण का मंदिर
परंपरा के अनुसार आज सुबह आठ बजे मंदिर के कपाट खोले गए और रावण की प्रतिमा का साज श्रृंगार किया गया। इसके बाद आरती हुई। आज शाम मंदिर के दरवाजे एक साल के लिये बंद कर दिये जाएंगे।
4 of 11
रावण का मंदिर
रावण के इस मंदिर के संयोजक केके तिवारी ने बताया कि कैलाश मंदिर परिसर में मौजूद विभिन्न मंदिरों में शिव मंदिर के पास ही रावण का मंदिर है. इसका निर्माण सौ साल पहले महाराज गुरू प्रसाद शुक्ल ने कराया था।
विज्ञापन
5 of 11
रावण का मंदिर
तिवारी बताते हैं कि रावण प्रकांड पंडित होने के साथ-साथ भगवान शिव का परम भक्त था। इसलिये शक्ति के प्रहरी के रूप में यहां कैलाश मंदिर परिसर में रावण का मंदिर बनाया गया।
विज्ञापन
6 of 11
रावण का मंदिर
भगवान शिव काे प्रसन्न करने के लिए देवी आराधना भी करता था। मां की अाशीष भी उसपर थी। बताया जाता है कि उसकी पूजा से प्रसन्न हाेकर मां छिन्नमस्तिका ने उसे वरदान दिया था कि उनकी की गई पूजा तभी सफल हाेगी जब भक्त रावध की भी पूजा करेंगे।
विज्ञापन
7 of 11
रावण का मंदिर
बताया जाता है कि करीब 206 साल पहले संवत 1868 में तत्कालीन राजा ने मां छिन्नमस्तिका का मंदिर बनवाया था अाैर रावण की करीब पांच फुट की मूर्ति उनके प्रहरी के रूप में बनवाई थी।
8 of 11
रावण का मंदिर
विजयदशमी के दिन मां छिन्नमस्तिका की पूजा के बाद रावण की आरती हाेती है अाैर मंदिर सरसों के दीपक अाैर पीले फूल चढ़ाए जाते हैं।
9 of 11
रावण का मंदिर
पुजारी के अनुसार मंदिर में तेल व पीला फूल चढ़ाने से ग्रह शांत हाेते हैं अाैर जीवन में खुशियां अाती हैं।
10 of 11
रावण का मंदिर
मान्यता है कि यहां रावण काे तेल अाैर पीले फूल चढ़ाने से भक्ताें के ग्रहाें के सारे दाेष समाप्त हाे जाते हैं अाैर घर में खुशिया अा जाती हैं।
मंदिर के पुजारी केके तिवारी ने बताते हैं कि मंदिर पर लाेगाें की अास्था है यही कारण है कि प्रत्येक दशहरे के दिन हजाराें की संख्या में भक्त यहां पूजा करने के लिए अाते हैं।