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Rashid Kalia: राशिद ने प्रेमिका के पिता संग बनाया था ‘भोर के लुटेरों’ का गैैंग, भाड़े में हत्या करना था काम

Sun, 19 Nov 2023 06:07 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: जाजमऊ की जेके कॉलोनी में सपा नेता चंद्रेश सिंह (अब भाजपा नेता) के घर पास बसपा नेता पिंटू सेंगर को गोलियों से भून दिया गया था। उनके शरीर में 19 गोलियां और 21 घाव मिले थे। वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारे बाइकों से 25 मिनट तक जेके कॉलोनी से पोखरपुर तक घूमते रहे थे।
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Rashid Kalia Encounter - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर शहर में सन 2000 से 2020 तक जरायम की दुनिया में सक्रिय रहे झांसी में मुठभेड़ में मारे गए राशिद कालिया उर्फ राशिद ऊंट का बचपन बेगमपुरवा में जम्मे वाली गली में बीता है। यहां की पार्क में क्रिकेट खेला करता था। मोहल्ले के कुछ लोगों ने उसे बम कसना सिखा दिया, तो अक्सर बेगमपुरवा की तंग गलियों में बम की टेस्टिंग किया करता था।

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लंबाई औसत से कुछ ज्यादा हुई, तो लोग उसे राशिद ऊंट कहने लगे। सूत्रों के मुताबिक 2002 के आसपास बेगमपुरवा में रहने के दौरान ही उसने अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर ‘भोर के लुटेरों’ का गैंग बनाया था। कुछ समय बाद स्मैक की लत लगी तो, उस दौरान जरायम में सक्रिय शफीक बोल्टू, सरताज चिड्ढा, पप्पू चिकना और रईस हनुमान का साथ पकड़ लिया।

राशिद ने ‘भोर के लुटेरों’ का गैंग बना लिया
कुछ दिन तक इनकी शागिर्दी में रहने के बाद राशिद खुद शातिर बन गया। इस दौरान रेलवे कॉलोनी में रहने वाली किशोरी से प्रेम संबंध हो गए थे। किशोरी के 11 भाई-बहन थे और पिता स्कूटर से चलते थे। किशोरी के पिता के साथ मिलकर ही राशिद ने ‘भोर के लुटेरों’ का गैंग बना लिया। चुन्नीगंज बस अड्डे से निकलने वाले कारोबारियों, रेलवे स्टेशन से निकलने वाले कारोबारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

मछरिया में बना लिया था अड्डा
तब ये लोग बीएनएसडी कॉलेज के पड़ोस वाली गली में सक्रिय रहते थे। वेश बदलने में माहिर प्रेमिका के पिता और राशिद ने देखते ही देखते आठ लोगों का गैंग बन गया। इसके बाद माल रोड पर विल्स सिगरेट की कंपनी का कैश लूटा। बेगमपुरवा का राशिद का अड्डा पुलिस की जानकारी में आया, तो राशिद ने मछरिया में अड्डा बना लिया। घनी आबादी की वजह से यहां पुलिस के पहुंचने से पहले ही जानकारी हो जाती थी।

वसूली, लूट और चेन छीनना हो गई थी आम बात
चकेरी में तमाम वारदातों को अंजाम दिया। राशिद और उसका गैंग चौक सर्राफा और नयागंज की बाजार में सक्रिय रहता था। वहां से मुखबिरी पाकर वारदातों को अंजाम देते थे। कुछ दिन तक गैंग के एक शातिर बदमाश के साथ राजा तिवारी के गैंग में भी काम किया। वसूली, लूट और किसी को भी बेवजह पीटकर चेन छीन लेना राशिद के लिए आम बात हो गई थी।

2020 में पिंटू सेंगर की हत्या के बाद से राशिद फरार था
परिवार में मां और एक बहन थी। गंज मुरादाबाद में गैंग के एक शातिर की ससुराल थी। अजीतगंज निवासी मुखबिर इस शातिर के घर पुलिस के साथ दबिश डालने पहुंच गया और दरवाजे तक उखाड़ लाया। इसके बाद मुखबिर की जूही स्थित सिंचाई विभाग के ऑफिस के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 2020 में पिंटू सेंगर की हत्या के बाद से वह फरार था।

पिंटू को गोलियों से भूनने के बाद चौराहों पर घूमते रहे थे हत्यारे
जाजमऊ की जेके कॉलोनी में सपा नेता चंद्रेश सिंह (अब भाजपा नेता) के घर पास बसपा नेता पिंटू सेंगर को गोलियों से भून दिया गया था। उनके शरीर में 19 गोलियां और 21 घाव मिले थे। वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारे बाइकों से 25 मिनट तक जेके कॉलोनी से पोखरपुर तक घूमते रहे थे। मामले में छह लोगों पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी।

नाम बचाने में मोटी रकम ली गई थी
जांच में कई और नाम सामने आए। घटना में नाम हटाने, सबूतों से खेल करने में कुछ जांच अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई। एक पीपीएस अफसर का घटना के बाद फोन कनेक्शन भी सामने आया। उन्होंने जांच को प्रभावित करने का काम किया। लिहाजा, उनका ट्रांसफर हुआ। चर्चा थी कि नाम बचाने में मोटी रकम ली गई थी। इसकी शिकायत हुई तो एक बड़े अफसर के दखल के बाद रकम वापस भी करनी पड़ी थी।
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पिंटू के माता-पिता और भाई ने कहा, गैंग के एक-एक सदस्य का यही हो हस्र
पिंटू सेंगर हत्याकांड के शूटर राशिद कालिया के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उनके परिवार ने राहत की सांस ली है। भाई धर्मेंद्र ने कहा कि राशिद के फरार होने से पूरा परिवार दहशत में था। अब परिवार ने राहत की सांस ली है। धर्मेंद्र सेंगर ने कहा कि हत्या शूटर राशिद कालिया ने पप्पू स्मार्ट के कहने पर की थी। गैंग के मुखिया पप्पू स्मार्ट और सभी शातिरों का भी एनकाउंटर होना चाहिए।
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