फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुद बीमार न करें तो 300 साल स्वस्थ रहता है दिल, विश्व में तेजी से बढ़ी इस बीमारी के बारे में जानें

Tue, 16 Apr 2019 05:00 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन
शरीर में सिर्फ दिल ही ऐसा अंग है जो बढ़ती उम्र के साथ भी खराब नहीं होता। बशर्ते उसे बीड़ी, सिगरेट, मोटापा, आरामतलबी, बिगड़े खानपान, हाइपरटेंशन सरीखी बीमारियों से खराब न किया जाए। दिल 300 साल तक स्वस्थ रह सकता है, जबकि गुर्दे, लिवर आदि दूसरे अंगों की कोशिकाओं में एक उम्र के बाद खराबी आने लगती है।
विज्ञापन


कानपुर में यह जानकारी फोर्टिस एस्कोर्ट के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील मोदी और डॉ. रंजन मोदी ने दी। उन्होंने बताया कि शोधों से यह तथ्य साबित हो चुका है कि अगर रिस्क फैक्टर से न बचा गया तो ब्लॉकेज के बिना भी कभी भी हार्ट अटैक पड़ सकता है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिसनर्श (आईएमएसीजीपी) के रिफ्रेशर कोर्स के दूसरे दिन हार्ट अटैक से बचाव के संबंध में प्रजेंटेशन दिया गया। इस मौके पर डॉ. रंजन मोदी ने बताया कि हार्ट अटैक बुढ़ापे की नहीं अधेड़ उम्र की बीमारी है। कोलेस्ट्राल बढ़े रहने से धमनियों में खुदरापन आ जाता है। इससे खून का थक्का जमता है और हार्ट अटैक पड़ता है।

उन्होंने बताया कि 30 फीसदी ब्लॉकेज पर एंजाइना का दर्द नहीं होता लेकिन इससे कभी भी हार्ट अटैक हो सकता है। इससे बचने का सही तरीका यही है कि हार्ट अटैक करने वाले रिस्क फैक्टर को नियंत्रित रखा जाए। अगर हृदय रोग हो गया है तो रिस्क फैक्टर को नियंत्रित करके खतरा टाला जा सकता है। डायबिटीज, हाईपरटेंशन की समय से पहचान करके उपचार शुरू कर देना चाहिए।
विज्ञापन

महत्वपूर्ण तथ्य
- 21-22 साल की उम्र में शरीर का जो वजन हो उतना वजन सारी उम्र बनाए रखें, बीमारी से बचेंगे।
- 22 साल के बाद शरीर का सारा विकास हो चुका होता है, उसमें सिवाए चर्बी के कुछ नहीं बनता है।
- मोबाइल नंबर की तरह ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल और ब्लडशुगर का नंबर याद रखें।

विश्व में बढ़ रहीं ऑटो इम्यून बीमारियां
रिफ्रेशर कोर्स के डायग्नोस्टिक मार्कर्स ऑफ आटो इम्यून डिसीज के सत्र में दिल्ली से आए पैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि इस समय आटो इम्यून बीमारियों की संख्या बढ़ रही है। इसमें शरीर की सुरक्षा करने वाली कोशिकाएं ही अंगों पर हमला करने लगती हैं। वे अपने ही शरीर की कोशिकाओं को शत्रु समझती हैं। इसमें र्यूमेटॉयड आर्थराइटिस रोग सबसे अधिक होता है। उन्होंने बताया कि अब आटो इम्यून बीमारियों का पैथोलोजिकल टेस्ट से पता लगाया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. विकास मिश्र मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें