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व्हाट्सएप पर बेवजह के मैसेज भेजने की आदत है तो समझें आप मनोरोग की गिरफ्त में हैं, जरूरी जानकारी

Tue, 16 Apr 2019 04:02 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डॉ. श्रीकांत श्रीवास्तव ने दी जानकारी - फोटो : अमर उजाला
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अगर कोई यह कहता है कि उसे भूलने की बीमारी है तो यह समझ लीजिए उसे बीमारी नहीं कोई और समस्या है। जिसे भूलने की बीमारी होती है, उसे अपना मर्ज पता ही नहीं चलता है। कानपुर में यह जानकारी किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के वृद्धावस्था मानसिक रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत श्रीवास्तव ने सोमवार को आईएमएसीजीपी रिफ्रेशर कोर्स के तकनीकी सत्र में दी।
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उन्होंने बताया कि मनुष्य का दिमाग 40 साल के बाद बूढ़ा होने लगता है। 18 साल की उम्र में मस्तिष्क पूरी तरह से तैयार हो जाता है। 25 साल की उम्र तक मस्तिष्क की कार्यक्षमता भरपूर रहती है।
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मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि भूलने की शिकायत करने वाले मरीज को अवसाद, स्ट्रेस या कोई और दिक्कत होती है। एहतियात और सतर्कता बरती जाए तो 70-75 साल की उम्र में भी दिमाग अच्छी तरह काम करता रहेगा।

बुजुर्गों की मानसिक बीमारियों पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि फिजीशियन डॉक्टर अपनी लिमिट समझें। एक लिमिट के बाद वे ऐसे रोगियों को मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास रेफर कर दें। इस मौके पर मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. रवि कुमार और डॉ. गणेश शंकर मौजूद रहे।
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सोशल साइट्स बना रही हैं मनोरोगी
जिसे व्हाट्सएप पर बेवजह के मैसेज भेजने की आदत है, वह मनोरोग की गिरफ्त में हैं। डॉ. श्रीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि सोशल साइट्स की लत लोगों को मनोरोगों के खड्ड में धकेल रही है। यह एक प्रकार ऑब्सेशन है, जिसमें लोगों को ट्विस्टेड मैसेज भेजने में आनंद आता है। इसके बाद यह समस्या गंभीर होती चली जाती है। सोशल साइट्स का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से किया जाए।
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