देश के 14 वें राष्ट्रपति की दौड़ में खड़े रामनाथ कोविंद की जीत लगभग तय मानी जा रही है। राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना का शाम पांच बजे तक परिणाम आ जाएगा। एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
रामनाथ कोविंद का जन्म यूपी में कानपुर के परौंख गांव में 1 अक्टूबर 1945 को हुआ था। यही पर पढ़ लिखकर कोविंद ने अपना राजनीतिक सफर तय किया है।
क्या आप जानते हैं आज भी कोविंद की कई गांव की यादें उनके परिवार को लोगों स्मरण हैं। जानिए कोविंद के गावं की यादों से जुड़े किस्सों के बारें में खुद उनके परिवार के सदस्यों की जुबानी...
रामनाथ कोविंद की भतीजी हेमलता
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
कोविंद की भतीजी हेमलता से बातचीत के अंश
23 तारीख को पूरा परिवार चाचा जी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए दिल्ली जाने की तैयारी कर रहा है। मुझे याद है चाचा जब भी घर आते थे तो हमेशा पढ़ने का सबक सिखाते थे। कहते थे टीवी पर देखना है तो खबरें देखों और ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ो। चाचा जी ने हमेशा शिक्षा, सत्यता और कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित किया...
वे जब भी यहां आते थे तो गन्ने के रस की खीर और खिलौरी की मीजा (यहां गांव में बनने वाली कड़ी) बनाने को कहते थे। मुझे याद है जब वे आखिरी बार आए थे तब भी वे गन्ने की खीर खाना नहीं भूले थे। उनसे तब भी रहा नहीं गया और गन्ने के रस से बनी खीर चखी। हां इस बार वे केवल एक चम्मच ही खीर चख पाए। दरअसल, अब उन्हें शुगर है।
जब उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था तो उनका फोन आया था.. वे बहुत खुश थे। उन्होंने कहा था शपथ ग्रहण समारोह में जरूर आना। अब पूरा परिवार वहां जाने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
रामनाथ की भाभी विद्यावती को मिठाई खिलाते लोग
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
कोविंद की भाभी विद्यावती से बातचीत के अंश
कोविंद की भाभी विद्यावती ने बताया झींझक में लोग उन्हें आज भी लल्ला कहकर पुकारते हैं। यहां छोटे बच्चे को लल्ला कहते हैं। रामनाथ कोविंद की भाभी ने ये भी बताया कि उन्होंने पूरे सावन लल्ला (रामनाथ कोविंद) के लिए घर के बाहर बने शिवलिंग की सुबह-शाम पूजा की। लल्ला खुद भी पूजा पाठ में बढ़ा विश्वास रखते थे।