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अयोध्या में बाबर से जुड़े कोई भी प्रमाण नहीं, स्वास्तिक-ओम के चिन्ह मिले हैं- रामविलास वेदांती

Thu, 10 Oct 2019 05:22 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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रामविलास वेदांती - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा के पूर्व सांसद एवं रामजन्म भूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष रामविलास वेदांती ने कहा कि अयोध्या में बाबर से जुड़े कोई भी प्रमाण नहीं हैं। ना तो वहां किसी गली और मोहल्ले और ना ही किसी सड़क का नाम बाबर के नाम पर रखा गया है। यह बात अयोध्या में श्री राम मंदिर जन्मभूमि को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार की तरफ से आई है।
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इससे साफ है कि अयोध्या में सिर्फ भगवान श्रीराम से जुड़े ही तथ्य मौजूद हैं। डॉ. वेदांती गुरुवार को कानपुर के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बताया कि राम जन्म भूमि मंदिर के नीचे भगवान शंकर का मंदिर मिला है। स्वास्तिक ओम के चिन्ह मिले हैं, दुर्गा वाराह और बजरंगबली की मूर्तियां भी मिली हैं,यह सब नासा के जरिए पता लगाया गया है।

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ये पार्टी मंदिर निर्माण में जानबूझकर रुकावट पैदा कर रही है। वेदांती ने कहा कि ओझा मसले पर चल रही सुनवाई नवंबर तक पूरी हो जाएगी और फैसला राम मंदिर निर्माण के पक्ष में आएगा। लोकसभा में मंदिर निर्माण के लिए कानून पारित करके अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा। 

मंदिर निर्माण कार्य 2022 के पहले हो जाना चाहिए, ऐसी पूरी उम्मीद है। भाजपा के पूर्व सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में शांति की स्थापना करना चाहते हैं। राष्ट्रीय सद्भावना बनी रहे इसी भावना सेवा मुसलमानों में भी तीन तलाक जैसी कुरीतियों को खत्म कर उन्हें देश का अच्छा नागरिक बनाना चाहते हैं।
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भारत वर्ष के 80 फीसदी मुसलमान मोदी के नीतियों के पक्ष में हैं। डॉ. वेदांती ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की भावना सभी के प्रति अच्छी है इस बात को देश की जनता भी अब समझने लगी हैय़ कांग्रेस पाकिस्तान से भी ज्यादा धारा 370 और 35 से खत्म करने का विरोध कर रही है।

संत डॉ. रामविलास वेदांती ने कहा कि कानपुर का पौराणिक स्थल बिठूर भी राम सर्किट से जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि यहीं पर बाल्मीकि रामायण की उत्पत्ति हुई है। देवी सीता ने भी यहां रहकर इस स्थान को पवित्र किया। उन्होंने कहा कि राम वन गमन मार्ग की तरह बिठूर से अयोध्या तक सीता वन गमन मार्ग का निर्माण भी होना चाहिए। सीता वन गमन मार्ग उसी रास्ते पर बनना चाहिए जिस रास्ते से लक्ष्मण जी सीता को लेकर बिठूर आए थे।
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