इसे पुलिस के एहतियाती उपाय कहें या धर्म और मजहब के नाम पर की जा रही राजनीति। बांदा की प्रसिद्ध महेश्वरी देवी मंदिर की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बांदा नवाब द्वारा बनवाई गई ऐतिहासिक नवाबी जामा मस्जिद की अभेद और अभूतपूर्व सुरक्षा में प्रशासन और पुलिस ने ताकत झोंक दी। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनाती के साथ मस्जिद के इर्दगिर्द जबरदस्त बेरीकेडिंग लगवाई गई। हालांकि ऋषि बामदेव और नवाब की नगरी के बाशिंदों और खासकर युवाओं ने अपने शहर की सौहार्द को विरासत को आंच नहीं आने दी। मस्जिद से अजान और शोभा यात्रा में जय श्रीराम की सदाएं सौहार्द का संदेश देती रहीं।
शहर स्थित महेश्वरी देवी मंदिर भारत की 51 सिद्धपीठों में शामिल है। इसके निर्माण के लिए बांदा के तत्कालीन मशहूर जमींदार यूसुफ जमां ने स्वेच्छा से भूमि दान की। वे यहां के आनरेरी मजिस्ट्रेट भी थे। मंदिर से चंद कदम दूर उनकी कोठी आज भी है। बताते हैं कि नवाब अली बहादुर के यहां महेश्वरी नामक कारीगर काम करता था। उसके रास्ते में देवी प्रतिमा थी। इसे धूप और बरसात से बचाने के लिए महेश्वरी रोजाना जब नवाब के यहां से काम खत्म करके लौटता तो इस्तेमाल से बच गया चूना-पत्थर साथ ले आता और चिराग की रोशनी में मंदिर के लिए मढ़िया का निर्माण करता। कहते हैं कि एक दिन देर रात नवाब सैनिकों के साथ लौट रहे थे तो उन्हें चिराग की रोशनी में काम करता हुआ महेश्वरीदीन नजर आया। नवाब साहब उसकी इस श्रद्धा से बहुत प्रभावित हुए और उसे हुक्म दिया कि पहले वह यह मंदिर बनाए बाद में उनका महल बनेगा।
आज भी महेश्वरी देवी और जामा मस्जिद दोनों ही ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था के मुख्य केंद्र हैं। हिंदू-मुस्लिम दोनों ही एक-दूसरे के धर्मस्थलों का सम्मान और कद्र करते हैं। उधर, रविवार को रामनवमी के अवसर पर नवाबी जामा मस्जिद के सामने रामनवमी की शोभायात्रा गुजारने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के सभी एहतियाती उपाय करने में पूरी ताकत झोंक दी। मस्जिद के मुख्य गेट के सामने की सड़क बैरीकेडिंग से पूरी तरह सील कर दी। साथ ही सड़क पर बड़े वाहनों का काफिला खड़ा करके नाकेबंदी कर दी। बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। शोभा यात्रा में शामिल जोश से भरे युवा भगवा ध्वजों के साथ मस्जिद के सामने डिवाइडर के उस पार की सड़क से गुजरते रहे। सौहार्द के कई क्षण ऐसे भी आए जब मस्जिद से अजान और शोभायात्रा से जय श्रीराम के नारे एक साथ गूंजते रहे।