प्रार्थना पत्र में कहा गया कि 23 मार्च को सैफई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रो. रामगोपाल ने केंद्र सरकार पर टिप्पणी की थी कि ‘पुलवामा में वोट के लिए जवान मार दिए गए। जब केंद्र में सरकार बदलेगी तो मामले की जांच कराई जाएगी। इसमें बड़े-बड़े लोग फंसेंगे’।
रविकांत के अधिवक्ता आनंद शंकर जायसवाल ने तर्क दिया है कि सीआरपीएफ जवानों से भरी बस पर हुए हमले के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) से जांच कराई थी, जिसने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को हमले का जिम्मेदार ठहराया था। राष्ट्रहित के मद्देनजर इस गोपनीय रिपोर्ट पर सवाल उठाना राष्ट्रद्रोह के दायरे में आता है।