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डियर तापमान..कितना गिर गए हौ तुम: राजू श्रीवास्तव

Mon, 24 Dec 2018 01:30 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
डियर तापमान.. सरम आवत है तुम पे.. छी..!! कितना गिर गए हौ तुम..!! दोस्तों आज काल भयंकर ठंड पड़ रही है मच्छर भी आय के कहि रहे हैं भईया काटब नाहीं थोड़ी देर रजाई में घुस लेन देव.. अउर हमरा आज का विचार ई है कि पानी मा भिगिहौ तो कपड़ा बदल लेहो..
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डेमो पिक
अउर पसीना मा भिगिहौ तो किस्मत बदल लेहो.. वइसे ससुरी दुई दिना से रात मा हमका कुछ जादा ही ठंड लग रही है.. हम एका कारन पता लगावा तो पता चला कि हमरी रजाई अभीन तलक आधार कार्ड से लिंक नहीं भई.. तो भईया आपन आपन रजाई आधार कार्ड से लिंक करवाओ अउर सरदी से बचौ..
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डेमो पिक
वइसे भी आजकाल रात मा सोवे के टाइम दस से पंद्रह मिनट तो खाली रजाई गरम करे मा लग जात हैं.. अउर अइसे मा जइसेहे आप रजाई गरम करि के सोवे वाले होत हौ.. वइसेहे आवाज आत है कि जरा देखौ तो दरवज्जे पे को आय .. कसम से जी करत है दरवज्जा खटखटावे वाले का आत्मघाती हमले से उड़ा देई.. अभीन आजै की बात सुनौ..

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डेमो पिक
आज हमरे घर मा सब लोग हाल मा बइठे रहे.. तबहीं हमसे गलती से छत वाले पंखे केर बटन दब गवा.. हमरा पूरा परिवार हमका अईस घूर के देखत रहा जइसे हम कौनो आतंकवादी होंय.. दोस्तों सर्दी का मौसम यानी सादी ब्याह का मौसम.. वैसे केहू केहू के लिए ई मौसम बड़ा बेदर्द भी होत है.. एक सादी में हमका कृष्णा नगर के बच्ची यादव मिले.. थोड़ा उदास रहे.. हम कहा का हुवा में?..
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डेमो पिक
तो हमरे साथ गजोधर रहे.. उई हमका बताईन कि ई जौने लड़की केर सादी का फंक्शन होय.. ई बच्ची यादव ओसे मुहब्बत करत रहें.. यही मारे उदास हैं.. बच्ची यादव कहिन नहीं अईस बात नहीं ना.. हम अईस दुखी हन कि हमरे खाय से पहिलेहे गाजर का हलवा खत्म हुई गवा.. हम कहा ये बात..!! इसक मुहब्बत एक तरफ.. गाजर का हलवा एक तरफ.. वइसे दुखी मत होओ..
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डेमो पिक
गाजर का हलवा सही नहीं बना रहै.. खैर फंक्शन से वापस आय के हम अउर गजोधर मोहल्ले बइठे आग तापत रहेन.. हुंवा कुछ बूढ़े मनई भी रहे.. एक कहे लाग कि ई साल सरदी अइस पड़ी है कि सौ साल का रिकॉर्ड टूट गवा.. तो गजोधर कहिन चुप रहौ चच्चा.. यही बात तुम हर साल कहत हौ.. अइसेहे एक बार भयंकर ठंड केर बात है.. हम कार से संकठा के साथ कन्नौज मा एक शादी मा जाय रहे रहन .. ससुर कोहरा इत्ता रहा की बगल मा बइठे संकठा नजर नहीं आवत रहें.. एक तो गाड़ी का सीसा ना बंद होए.. सरसरौवा ठंडी हवा लगत रहे..
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डेमो पिक
गाड़ी चलावत रहें रग्घू.. नजर का मोटा चश्मा लगाए रोड पर दीदे गड़ाए टटोल-टटोल के चलावत रहें.. तबहीं रोड के किनारे हमका एक चाय का होटल दिख गवा तो हम कहा गुरु एक ठौ चाय हुई जाय.. हम एक कप चाय लैके पिए वाले रहें कि संकठा कहिन हमहू पीबे.. तो हम कहा एमा चाय बहुत है एक खाली कप लई लेव दुईनो जन पी लेहें.. हम एक चाय का दुई जगह किहेन अउर बस पिये वाले रहें की रग्घू कहिन हमहू पीबे.. तो संकठा कहिन अबहूं चाय बहुत है एक खाली कप लै आव.. एक मा तीन कई लिहा जाई ..

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डेमो पिक
चाय वाला ई सब देख के खौरियावत रहा.. जब हम तीनों लोग चाय पी चुके तो उससे पूछे भैया कित्ते पईसे भये.. तो चायवाला कहे लगा कि पईसा गवा भाड़ में.. बस ई तीनों कप धोय के जाओ.. ठंडी बहुत रहै न.. कप धोये मा भी जान जावत रही.. खईर हम आगे बढे़ तो कोहरा अउर बढ़ गवा.. रग्घू बुरी तरह चौन्धीयावत रहै तबहिन इक ठो कार बगल से गुजरी तो हम कहा अबे रग्घू यही कार के पीछे पीछे लगाय लेव.. एकी रेड लाइट का फॉलो करौ.. बस भइया.. अब ऊ कार आगे आगे अउर हम पीछे पीछे..

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डेमो पिक
तबहिन उई कार रुक गई तो हमहूं लोग रुक गएन.. बड़ी देर तक कार वाला आगे नहीं बड़ा तो हम गए ओकी गाड़ी के पास अउर ओका सीसा ठोंका की भैया आगे बढ़ाओ काहे रोक दिए हौ.. तो ऊ कार वाला आदमी दुई तीन लोगन का आवाज दै के बुलाये लगा की सरऊ हमरी गाड़ी की रेड लाइट फॉलो करत-करत तुम हमरे घर मा घुस आये हौ..
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डेमो पिक
आंखें गड़ा के देखा तो पता चला हम लोग ओके बंगले केर गेराज मा रहन..। बड़ी मुस्किल में वहां से जान बचा के हम लोग आगे बढे़ और जईसे तईसे कन्नौज पहुंचे.. लास्ट मा एक्के बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ.. काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है ..
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