दोस्तों पिछले दिनों हम कानपुर आय रहेन तो सोचे चलो आपन दोस्त संजय रंगवाले से मिला जाए.. हम उठावा स्कूटर अउर चल पड़ेन.. काहे से पेट्रोल पांच रुपया सस्ता हुई गवा है ना..। हम जईसैह उनकी फैक्ट्री पहुंचेन तो ऊ लपक के मिले.. अरे राजू भईया.. का बात है.. अउर सुनाओ.. कुछ खइहौ.. चाय वाय.. तो हम कहा अबे अन्दर आवे तो देव.. तो कहे अरे लेव यार कुछ तो लेव.. हम कहा यार बईठे तो देव.. तो कहे नहीं यार कुछ तो लें का पड़ी.. तो हम बइठत बइठत कहा ठीक है चाय मंगाय लेव.. तो संजय कहिन अच्छा चाय पियोगे.. मतलब पियोगे चाय.. मनिहौ ना..।
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राजू श्रीवास्तव
फिर ऊ आपन लौंडे का आवाज लगाईन.. अबे गुड्डू .. बंदूक लाव जरा.. अउर सुनौ.. बन्दूक लोड करि के लैव..। हम कहा ई का है बे.. बंदूक काहे.. तो कहे लगा अरे काहे घबराये रहे हौ बे.. कानपुर मा बहुत तरक्की हुई गयी है..। अब पहिले जइसन नहीं ना कि सड़कन पे सुवरिया लोट रही हैं.. गय्या भैंसिया रोड पे गोबर कर रही हैं..। हम कहा चलो ठीक है.. तबहीं गुड्डू बन्दूक लै के आवा.. तो संजय उस से बन्दूक लै के धांय-धांय दुई फायर किहिन.. हम कहा ई का है बे.. तो कहे अबे चाय वाले का दुई चाय बोला है.. बताओ ई रंगबाजी चल रही है आजकल कानपुर मा..।
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राजू श्रीवास्तव
फिर शाम का हम गजोधर के साथ झकरकटी बस अड्डे गए.. हुंवा मनोहर, संकठा, बैजनाथ, पुत्तन, छुट्टन और तिवारी महफिल जमाय भये रहे.. हमहूं उन लोगन का ज्वाइन कर लिहेन.. तबहीं हम देखा एक लौंडा पूरे बदन मा नीला रंग पोते.. बोरा टाइप सूट पहिने घूमत रहा.. जइसन ऋतिक रौशन केर फिलिम कोई मिल गया का जादू.. हम कहा ई का है बे.. तो तिवारी कहिन अरे ई जादू है जादू.. अबे जादू.. हिंया आव.. तुम का खात हौ.. तो ऊ कहिस धूप.. धूप.. तबहीं पुत्तन गुटखा केर पुड़िया फाड़ के ओके मुंह में डाल दिहिन.. हम कहा ई का किहेव.. तो पुत्तन कहिन ई धूप तो रोजेन खात है..
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राजू श्रीवास्तव
आज गुटखा खायं.. फिर गजोधर बताइन कि ईका नाम लट्टू है अउर ई रामनारायन बजार में नौशाद भाई ड्रेस वालन के हिंया काम करत है.. रोज शाम का ड्यूटी खतम होय पर हुंवा से कोई ना कोई ड्रेस पहिन के आत है अउर हिंया घूमा करत है.. परसों गब्बर सिंह बना रहा.. कल शहंशाह बना घूमत रहा तो ईका कुत्ते दौड़ाय लिहिन रहें.. तो लट्टू कहिस अरे शहंशाह बनना बहुत मुश्किल काम है भइया.. तो बैजनाथ बोले ई हम लोगन का कम बजट वाला कनपुरिया मनोरंजन है भईया..।
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राजू श्रीवास्तव
हम कहा कानपुर के लोग बहुत तरक्की कर गए हैं यार.. तो मनोहर कहिन अरे ई तो कुछौ नहीं ना.. हमरे रामदेवी के लौंडे बैटरी चाट के बता देवत हैं की ओमा केतनी पावर है.. तो संकठा बोले हमरे ग्वालटोली के लौंडे तो गोबर सूंघ के भैंस केर उमर बता देवत हैं.. तबहीं बैजनाथ बोले हमरे परमपुरवा के लौंडे तो बहुतै परम हैं.. ऊ बाइक हिला के बता देवत हैं की बाइक केर टंकी मा केतना पेट्रोल है.. तो पुत्तन बोले ई तो कुछौ नहीं ना बे.. हमरे नयी सड़क के लौंडे तो मोबाइल हिला के बता देवत हैं कि ओमा बैलेंस कितना है.. हम कहा यार सच मा आपन कानपुर बहुतै तरक्की पे है..
अगले दिन हम गुमटी की तरफ गएन तो हुंवा देखा बहुत भीड़ लगी रही.. पता चला केसरी चाचा के हिंया चोरी हुई गयी है.. सब लोग हुंवा गजोधर पे गुस्सावत रहें.. कि तुम तो देखे रहेव चोर का.. तो हम पूछा गजोधर से कि तुम चोर का देखे रहेव?.. तो गजोधर कहिन हां हम देखा रहा चोर का.. इधेरेन गली से भागे रहें.. तो हम कहा यार तो उनका पकडे़ खातिर पीछे भागेव काहे नहीं.. इस पे गजोधर कहिन हम भागे रहें.. लेकिन भईया हम चोर लोगन से आगे निकल गए रहेन.. तुमका तो पतेन है हम भागे मा उस्ताद हैं.. हम कहा सच में हमरे कानपुर के लोग अजीब हैं.. तो गजोधर बिरझाय के बोले अजीब का मतलब.. का कानपुर वालन के मुंह पीछे की तरफ होत हैं.. का कानपुर वाले नाक से चाय पियत हैं?.. हम कहा नहीं बे.. आपन कानपुर वाले अजब हैं.. मतलब गजब हैं.. एकदम रॉकिंग !! लास्ट मा एक्के बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ..काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है ..