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शिकागो की कहानी संहिता की जुबानी....लोग रात में भी नहीं तोड़ते ट्रैफिक के नियम

Mon, 08 Oct 2018 07:22 PM IST
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
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संहिता अग्निहोत्री
अमेरिका का शिकागो शहर... इस शहर को लोग नहीं उनके अंदर बसी ईमानदारी चलाती है। फिर चाहे बात यातायात नियमों की करें, चाहे बैंक के बाहर लगने वाली लाइन की करें या मॉलों में खुले पड़े सामान की। नियम कायदों के प्रति लोगों में इतनी ईमानदारी ने मुझे बहुत प्रभावित किया। ये कहना है कानपुर, आर्य नगर निवासी संहिता अग्निहोत्री का।

 
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संहिता अग्निहोत्री
संहिता अग्निहोत्री कहती हैं कि मैं ही नहीं दूसरे देशों से आने वाले लोग भी यहां का अनुशासन देखकर अनुशासित नजर आए। दिन हो या रात ट्रैफिक की लाइट रेड हो गई तो कोई भी वाहन सिग्नल नहीं तोड़ता। अपने यहां तो दिन में, वह भी पुलिस के सामने ही लोग नियम तोड़ते नजर आते हैं। गाहे बगाहे पकड़े भी गए तो पुलिस ले देकर छोड़ देती है। शिकागो में ऐसा नहीं है। पुलिस ने पकड़ा और आप दोषी पाए गए तो कार्रवाई तय है। 

 
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संहिता अग्निहोत्री
शिकागो की खासियत के बारे में संहिता ने कहा कि यहां सड़कों पर कैमरे लगे हैं। नियम तोड़ा तो घर में चालान पहुंचता है। पुलिस के इंडिकेशन देते ही लोग रुक जाते हैं। कानपुर की तरह भागते नहीं हैं। शिकागो मेें ड्राइविंग लाइसेंस पाना भी बहुत मुश्किल है। सड़क के सारे नियम कायदे पता होने चाहिए। कानपुर की तरह ले देकर काम चलने वाला नहीं।

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संहिता अग्निहोत्री
उन्होने बताया कि शापिंग मॉल की बात करें तो यहां सब कुछ लोगों की ईमानदारी पर चलता है। सारी चीजें खुली पड़ी हैं, लोग सामान लेते हैं और कैश काउंटर में बिल चुका देते हैं। अपने यहां के मॉलों की तरह नहीं हैं, ग्राहक से ज्यादा केयरटेकर नजर आते हैं। यही वजह है कि कम लोगों से भी यहां बड़ा से बड़ा काम आसानी से चल जाता है।
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संहिता अग्निहोत्री
संहिता बताती हैं कि लोग भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन खुद करते हैं। चाहे वह साफ सफाई का मामला हो या हरियाली का। इधर कोई भी गंदगी नहीं फैलाता। पेड़ पौधों के प्रति भी लोग खासे जागरूक रहते हैं।
 
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