न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, सर्वोच्च न्यायालय, का स्वागत करते विवि के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक
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कानून का अधिक उल्लंघन उसकी जानकारी के अभाव में होता है। देश में पांच लाख से अधिक लॉ के छात्र-छात्राएं और लगभग छह लाख गांव हैं। अगर एक छात्र एक गांव को गोद लेकर लोगों को कानून की जानकारी दें, तो इस समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। यह बातें छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में शुक्रवार को आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का शुभारंभ करने आए मुख्य अतिथि व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश राजेश बिंदल ने कहीं।
उन्होंने कहा कहा कि समाज को सस्ते और सुलभ न्याय की आवश्यकता है। इसको देखते हुए मूट कोर्ट अत्यंत उपयोगी है। इस प्रतियोगिता में जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण भागीदारी है, क्योंकि सीखना एक सतत यात्रा है। डीपफेक के इस्तेमाल एवं साइबर अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने में नई पीढ़ी की भूमिका अहम होने वाली है।
सीखने, भूलने और फिर से सीखने का सुझाव दिया
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग और ई-एससीआर पोर्टल के बारे में बताया कि विभिन्न भाषाओं में 37,000 निर्णय को उपलब्ध कराया गया है, जो युवा अधिवक्ताओं के लिए उपयोगी है। कानून समाज के साथ विकसित होता है। छात्रों को सीखने, भूलने और फिर से सीखने का सुझाव दिया। डीप फेक के इस्तेमाल एवं साइबर अपराधों के बारे में बताया कि कैसे कंपनी आपका डाटा एकत्र करते हैं। उन्होंने ई-एससीआर, एससीआर एवं ई-कोर्ट के एप के बारे में जानकारी दी।