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राजाराम हत्याकांड :: दो लोगों के नाम होती रही रजिस्ट्री और एग्रीमेंट, एक बदलता रहा

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कानपुर। अधिवक्ता राजाराम हत्याकांड और उनकी जमीनी से जुड़े विवाद में सोमवार को एक रोचक बात सामने आई है। हत्या से करीब 12 साल पहले वर्ष 2009 में इस जमीन की कई रजिस्ट्री और एग्रीमेंट होने की जानकारी पुलिस के हाथ लगी है। खास बात यह है कि पहले दो लोगों के नाम लिखापढ़ी होती और अगली बार उनमें से एक बदल जाता। पुलिस इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है।
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मृतक अधिवक्ता राजाराम के बेटे नरेंद्र देव का आरोप है कि पांच दिसंबर 2008 में राजबहादुर, उसके दो भाई राज नारायण और रामचंदर ने पूरी जमीन का एग्रीमेंट कर लिया था। आरोपियों ने 10 हेक्टेयर भूमि के तीन चौथाई हिस्से का 10 लाख रुपये में लखनऊ के सुजानपुर आलमबाग निवासी जसप्रीत सिंह और आजादनगर निवासी डॉ. देवेंद्र द्विवेदी को एग्रीमेंट किया। इसमें तीन लाख रुपये नकद दिए गए। हालांकि, उसी दिन इस एग्रीमेंट को निरस्त कर 20 लाख रुपये में दोबारा किया गया। इस बार 20 लाख रुपये में इसी जमीन का दोबारा एग्रीमेंट हुआ। इसमें 10 लाख रुपये नकद दिए गए। इस बार डॉ. देवेंद्र की जगह दानाखोरी निवासी दुर्गेश कुमार शर्मा और जसप्रीत सिंह के नाम एग्रीमेंट किया गया।
इसके बाद 29 सितंबर 2009 को जसप्रीत सिंह और नौबस्ता के लवकुशनगर निवासी एके त्रिवेदी के नाम पर 36 लाख 20 हजार रुपये में 1.2375 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री हुई। इसके बाद इसी दिन 49.80 लाख रुपये में संजयगांधीनगर नौबस्ता निवासी राघवेंद्र सिंह और लवकुशनगर निवासी एके त्रिवेदी के नाम पर रजिस्ट्री की गई। नरेंद्र का दावा है कि 29 सितंबर को ही तीन अन्य रजिस्ट्री और एग्रीमेंट भी हुए हैं।
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