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डौंडियाखेड़ा के राजा राव रामबख्श ऐसे बनेंगे मुंबई की शान

Wed, 28 Dec 2016 01:06 AM IST
रामगोपाल तिवारी, अमर उजाला, कानपुर
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शहीद राव रामबख्श सिंह
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उन्नाव डौंडियाखेड़ा के राजा राव रामबख्श अब मुंबई ठाणे की शान बनेंगे। हजारों टन सोना दबा होने की सूचना से चर्चा में आए डौंडियाखेड़ा के राव रामबख्श सिंह को महाराष्ट्र में बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है। महाराष्ट्र के ठाणे में निर्माणाधीन शहीद राव रामबख्श सिंह चौक का काम अंतिम चरण में है। अगले साल फरवरी माह में यह चौक बनकर तैयार हो जाएगी। 
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 हजारों टन सोना दबा होने की सूचना के बाद डौंडियाखेड़ा के राव रामबख्श सिंह देश ही नहीं विदेश में भी चर्चा में आए थे। इसी आधार पर महाराष्ट्र के जिला ठाणे में भिवंडी-निजामपुर महानगर पालिका ने शहीद राव रामबख्श सिंह के नाम पर चौक निर्माण करा रही है। 4 अगस्त 2012 को पालिका के सदस्य विकास एस निकम ने अमर शहीद राव रामबख्श सिंह चौक निर्माण का प्रस्ताव सदन में रखा था। प्रस्ताव पर राजा साहब का इतिहास जानने के लिए महापौर व पीठासीन अधिकारी प्रतिभा विलास पाटिल ने एक समिति गठित की थी। समिति ने राव रामबख्श के इतिहास की गहन जानकारी हासिल की। अंग्रेजों के लिए आतंक बने रहे राजा साहब की पूरी जानकारी होने पर सदन ने उनकी शहादत का लोहा माना और 11 फरवरी 2013 को राजा राव रामबख्श सिंह के नाम पर क्षेत्र के अशोक नगर प्रवेशद्वार पर चौक निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। 10 नवंबर 14 को भिवंडी ट्रैफिक पुलिस ने एनओसी जारी कर दी। इसके बाद महानगर पालिका के उप आयुक्त वसीम शेख ने 4,98915 रुपये के कार्य के लिए 6 अप्रैल 16 को टेंडर निकाला। 22 जून को निविदा खोली गई। इसमें बुवेरे एंड असोसिएट्स और हिंदुस्तान इंटरप्राइजेज ने बोली लगाई। बाजी बुवेरे एंड असोसिएट्स के हाथ लगी। इसके बाद असोसिएट्स ने चौक का निर्माण कार्य शुरू कराया था। मौजूदा समय में 80 फीसदी चौक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। फरवरी 2017 में चौक बनकर तैयार हो जाएगा। 
कैसे मुुंबई पहुंचे राव साहब
बीघापुर तहसील के बारा निवासी विनोद चंद्रनाथ त्रिपाठी करीब 20 साल पहले मुंबई के ठाणे में जाकर बस गए थे। विनोद वहां पर ठेकेदारी करते हैं। बकौल विनोद उनके पूर्वज पंडित भलभद्रराम राव साहब के रियासत में जमींदार थे। साथ ही उनके करीबी सहयोगी थे। राव साहब के साथ उनके पूर्वजों ने भी देशहित के लिए कुर्बानी दी थी। विनोद ने ही राव साहब के लिए चौक बनाने का प्रयास शुरू किया था।
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राजा साहब को दी गई थी फांसी
28 दिसंबर 1859 को राव रामबक्स सिंह को बक्सर में फांसी दी गई थी। आठ अंग्रेजों को जलाकर मार डालने वाले राव साहब की कोई भी निशानी अंग्रेज छोड़ना नहीं चाहते थे। यही कारण था कि अंग्रेजों ने फांसी देने के बाद डौंडियाखेड़ा स्थित राव साहब के किले को गिरवाना शुरू कर दिया था। मजदूर जब किले की दीवार नहीं गिरा पाए तो अंग्रेजों ने तोप के गोले दागकर दीवार को गिराया। इसके बाद से ही डौंडियाखेड़ा वीरान हो गया। समय के साथ यहां बबूल के पेड़ों के जंगल उग आए। काफी समय तक बाबूजी के शिवाला (यहां राव रामबक्स सिंह भगवान शंकर की पूजा करते थे) में भी पूजा-अर्चना ठप रही। वर्ष  2013 में संत शोभन सरकार ने किले में हजारों टन सोना होने की घोषणा के बाद एकाएक डौंडियाखेड़ा देश-विदेश में प्रसिद्ध हो गया।
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