कानपुर देहात। खेतों में लहलहा रही जिन फसलों को देखकर किसानों ने कई सपने बुन लिए थे, उन पर ओलों की मार पड़ गई। गुरुवार को राजपुर, सिकंदरा व सरवनखेड़ा क्षेत्र के 41 से अधिक गांवों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया।
अब किसान सिर पर हाथ रखकर सरकार से राहत की आस लगाए बैठे हैं। किसानों के मुताबिक फसलों को 50 से 70 फीसदी तक नुकसान हुआ है। तेज हवाओं के साथ गुरुवार को हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की लहलहाती फसलों को तबाह कर दिया।
सबसे अधिक मार राजपुर ब्लॉक के बीहड़ पट्टी व सरवनखेड़ा क्षेत्र के किसानों पर पड़ी है। यहां पक रही सरसों की फसल ओलावृष्टि से खेतों में गिर गई। अब धूप निकलने पर फलियों के सड़ने का खतरा है। इसी तरह चने की फसल भी खेत में पट पड़ गई।
वहीं मटर की फसल में फूल टूट गए। जिससे पैदावार प्रभावित होगी। इसी तरह ओले की मार से गेहूं, टमाटर, अरहर, लहसुन व आलू की फसलों को भारी क्षति हुई है। किसानों का कहना है कि बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं की फसल भी 60 प्रतिशत तक बर्बाद हो गई है।
सिकंदरा तहसीलदार लखन लाल राजपूत ने बताया कि ओलावृष्टि से किसानों की फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए कृषि विभाग के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं।
ओलावृष्टि ने इन गांवों में मचाई तबाही
राजपुर व सिकंदरा क्षेत्र में बेहमई, डौडियापुर, बिजहरा, बकसौंधी, दमनपुर, भाल, गौरीरतन बांगर, खोजारामपुर, पिचौरा, अनवा, पैलावर, खासबरा, अमराहट, गोहानी, रमऊ, खलासपुर, गुबार, महदेवा, जैसलपुर, कमलपुर, रसूलपुर, दयानतपुर, डाढ़ापुर, कुचैता, जगईयापुर, सिमटामऊ, इंद्रपुरा, करीमनगर व सरवनखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में सैंथा, गंगागंज, मुक्तापुर, सरवनखेड़ा, गजनेर, जसवापुर, पियासी, गंगरौली, भिलसी, मनेथू, लोहारी, भैथाना व सेरूवा गांव में फसलें प्रभावित हुई हैं।