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Kanpur News: दो साल बाद मार्च में बरसा पानी, 12.5 डिग्री लुढ़का पारा

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कानपुर। बीते कई दिनों से गर्मी की तपिश झेल रहे लोगों को शुक्रवार को पांच मिमी हुई बारिश से काफी राहत महसूस हुई। दो साल बाद मार्च में बारिश हुई है। एक साथ कई चक्रवाती हवाओं के सक्रिय होने से माैसम बदला है। शुक्रवार सुबह होते ही बारिश शुरू हो गई और दिन में रुक-रुककर कई बार पानी बरसा। माैसम बदलने से दिन का तापमान एक झटके में 12.5 डिग्री सेल्सियस लुढ़ककर 22.4 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। रात का पारा बादल रहने की वजह से 2.2 डिग्री बढ़कर 18.8 डिग्री दर्ज किया गया। इस तरह का माैसम अभी 48 घंटे तक रहने की संभावना है।
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माैसम विशेषज्ञ डाॅ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि जो बारिश जनवरी और फरवरी में होनी थी, वह मार्च में हुई है। यह बारिश सिर्फ कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में नहीं बल्कि देश के 70 प्रतिशत क्षेत्रों में हुई है। लखनऊ और आसपास के कुछ क्षेत्रों में ओले पड़ने की भी खबरें मिली हैं। इस बीच तापमान में 12 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान गिरने से ठंड भी महसूस हुई। माैसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले तीन दिनों तक गेहूं की फसलों में अभी सिंचाई करने से बचें। बारिश के साथ हवाएं भी चल रही हैं, ऐसे में फसल गिर सकती है और पैदावार प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि शनिवार को कानपुर मंडल सहित मध्य उत्तर प्रदेश में सुबह से दोपहर 12 बजे तक हल्की बारिश की संभावना है। दोपहर बाद से नरम धूप निकल सकती है | कहीं कहीं बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। तापमान में चार डिग्री के आसपास गिरावट हो सकती है।
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पिछले वर्षों में मार्च में बारिश
2015 - 170.3 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
2018: तापमान 36 डिग्री रहा और बारिश न के बराबर दर्ज हुई।
2020: उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हल्की बारिश 2.3 मिमी दर्ज की गई थी।
2023: भारी बारिश दर्ज की गई। मार्च का महीना पांच दशकों में सबसे ठंडा रहा।
2024: इस महीने में वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई थी।
सामान्य औसत: मौसम विभाग के अनुसार, मार्च महीने में कानपुर में औसतन 5.3 मिमी बारिश होती है। बारिश हल्की फुहारों के रूप में होती है।
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कानपुर सहित प्रदेश के 25 जिले बारिश से प्रभावित
माैसम विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के कारण लखनऊ, पीलीभीत, अयोध्या, बाराबंकी और लखीमपुर खीरी (गोला गोकर्णनाथ) सहित 25 से अधिक जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी ओलावृष्टि और बारिश हुई। इस बेमौसम बारिश से गेहूं, सरसों और आलू की तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। खासकर लखीमपुर, पीलीभीत, और अयोध्या में सरसों व गेहूं की फसलें गिर गई हैं।
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मार्च में पिछले 20 साल से बारिश अस्थिर
फोटो
मार्च के महीने में पिछले 20 वर्षों में बारिश अस्थिर रही है। ऐसा पश्चिमी विक्षोभ के कारण होता है। आम ताैर पर मार्च में बारिश की संभावना कम कम होती है। आंकड़ों के अनुसार बरसात के महीनों के अलावा अन्य महीनों में बारिश के दिन लगातार घट रहे हैं, शुष्क दिन बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि आने वाले दिनों में तेज गर्मी के संकेत हैं। -डाॅ. एसएन सुनील पांडेय, माैसम विशेषज्ञ
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